डैनिश सरकार के इसमें शामिल होने की जानकारी नहीं

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जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल समेत यूरोप के राजनेताओं की जासूसी में डेनमार्क की सीक्रेट सर्विस ने अमेरिका की मदद की थी.

डैनिश मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक़ ये मामला साल 2012 से 2014 के बीच का है. डेनमार्क के पब्लिक सर्विस ब्रोडकास्टर डीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि डिफेंस इंटेलीजेंस सर्विस ने अमेरिकी की नेश्नल सिक्योरिटी एजेंसी के साथ मिलकर सूचनाएं जुटाईं.

कथित तौर पर ये खुफिया जानकारी जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और नॉर्वे के अधिकारियों के बारे जुटाई गई थी.

इसके बाद अमेरिकी व्हिसल ब्लोअर एडवर्स स्नोडेन ने जो जानकारियां सार्वजनिक कीं, उससे ये पता चला कि जर्मन चांसलर का फोन कथित तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए टेप कर रही थी.

जब ये आरोप लगाए गए तो व्हाइट हाउस ने इसका सीधे तौर पर खंडन नहीं किया था बल्कि ये कहा कि जर्मन चांसलर का फोन उस वक्त टेप नहीं किया गया था और ना ही भविष्य में ऐसा किया जाएगा.

जर्मनी अमेरिका का करीबी सहयोगी है.

जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वॉल्टर स्टीनमिएर और एंगेला मर्केल के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें डेनमार्क की सरकारी मीडिया में इसकी रिपोर्ट पब्लिश होने तक डैनिश सरकार के इसमें शामिल होने की जानकारी नहीं थी.

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