मुफ्त कानुनी सहायता और समाजिक जागरुकता /सहभागी शिविर

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मुफ्त कानुनी सहायता और समाजिक जागरुकता /सहभागी शिविर
आज चिरईगाव मुख्य कार्यालय लोक चेतना समिति व सहयोग संस्था लखनऊ की तरफ से ह्यूमन राइट्स ला नेटवर्क एवम् लोक चेतना समिति के तत्वाधान मे एक दिवसीय शिविर का
आयोजन किया गया ।कार्यक्रम मे संस्था के निर्देशिका रंजू जी ने विषय प्रवेश करते हुये बतायी कि मुफ्त कानुनी सहायता और समाजिक जागरुकता शिविर मे क़ानूनी जानकारी जैसे घरेलू हिंसा, यौनिक हिंसा ,महिला उत्पीड़न और कई प्रकार की जानकारी आप लोगो से साझा किया जाएगा जिससे पंचायत में होने वाली हिंसा के प्रति लोग जागरूक हो और उसे रोकने मे और महिलाओं की मदद कर सकेंगे ।इलाहाबाद हाईकोर्ट से आये अली जैदी जी ने बताया कि घरेलू दायरे में हो रही हिंसा को घरेलू हिंसा कहा जाता है। महिला हिंसा जैसे ,शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, मौखिक, या यौन शोषण किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाना जिसके साथ महिला के पारिवारिक सम्बन्ध हैं, घरेलू हिंसा में शामिल है। हमारे देश के संविधान में भी महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त है उसी आधार से महिला हिंसा सुरक्षा समानता ये संवैधानिक अधिकार महिलाओं के सुरक्षा हेतू बनाएं गए हैं । इन कानूनो की जानकारी लेकर आप अपनी व दूसरों की सुरक्षा कर सकती है । किसी भी प्रकार के हिंसा को सहन करना गैर कानूनी है। ऐसे हिंसा के प्रति आप को आवाज उठाना पड़ेगा। आप के घर मे कुछ रिश्ते को नाम पर हिंसा होता है और उसको रिश्ते का नाम देकर शांत करने का प्रयास किया जाता है। बहुत सारी हिंसा को महिला समझ नही पाती है कि यह हिंसा है । हमारे यहां किशोरियों के साथ भी यौनिक हिंसा, मानसिक हिंसा, शारीरिक हिंसा होता है पर लोग इसके विरोध में कोई कानूनी सहायता नहीं लेती इसलिये लोगों को न्याय नही मिलता। कानूनी जानकारी होने से पंचायत स्तर पर संगठन की महिलाओ को ऐसे कानून का सहारा लेने में मदद मिलेगी। लखनऊ से आई सुनीता जी द्वारा महिला स्वास्थ्य संबंधित मिलने वाली सुविधाओं जैसे जननी सुरक्षा योजना की जानकारी देने के साथ कार्यक्रम में आये प्रतिभागियों से प्राथमिक स्तर मिलने वाली सेवाएं उपलब्ध है या नहीं उसे निकलवाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में सुरेश झूला, वन्दना, संतोष निशा, पूजा, भागवानी, पूनम व 18 गांव से 59 महिलाओं की भागीदारी रही धन्यवाद ज्ञापन सुरेश जी द्वारा किया गया।
रिपोर्टर अनिल कुमार मौर्य चिरईगांव
मानवाधिकार मिडिया
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