जैनधर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदन्त स्वामी का निर्वाण महोत्सव मनाया गया

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पर्यूषण पर्व में पांचवें दिन धार्मिक अनुष्ठानों की धूमपहले चार दिनों में चार कषाय को छोड़कर पांचवें दिन उत्तम सत्य को किया अंगीकार।

उत्तम क्षमा मार्दव आर्जव भाव को धारण कर शौच सत्य संयम तप और त्याग के द्वारा आकिंचन और ब्रह्मचर्य को प्राप्त करना ही दशलक्षण धर्म है- विशाल जैन

सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने दी सुन्दर भजन की प्रस्तुति।

ललितपुर। सिद्ध क्षेत्र पावागिरि सहित तालबेहट के दोनों जैन मंदिरों में पर्यूषण महापर्व में पांच दिन से निरंतर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य धर्म प्रभावना हो रही है। सुबह नित्यमय अभिषेक के उपरांत विश्व शांति की मंगल कामना के साथ मंत्रोच्चार के मध्य शांतिधारा, पूजन विधान का आयोजन भव्यता के साथ किया जा रहा है। सुबह से ही केसरिया बस्त्र धारण कर अष्टद्रव्य का थाल लेकर पुरूष महिलाएँ एवं बच्चे मंदिर जी पहुंचते एवं कोविड-19 के नियमों का पालन कर भक्ति भाव से पहले चार दिनों में चारों प्रकार की कषाय क्रोध, मान. माया. लोभ को छोड़कर उत्तम क्षमा मार्दव आर्जव और शौच का भाव धारण कर पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना की गई। इन दस दिनों जैन समुदाय में निराहार रहकर, पानी-दूध लेकर, फलाहार करके या शुद्ध और सात्विक स्वल्पाहार लेकर व्रत उपवास करने की परम्परा है। अहिंसा सेवा संगठन के संस्थापक विशाल जैन पवा ने कहा कि उत्तम क्षमा मार्दव आर्जव भाव को धारण कर शौच सत्य संयम तप और त्याग के द्वारा आकिंचन और ब्रह्मचर्य को प्राप्त करना ही दशलक्षण धर्म है, जिसकी आराधना पर्यूषण पर्व में की जाती है। शुक्रवार को प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान शनिवार को 20 वे तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ भगवान, रविवार को 23 वे तीर्थंकर पारसनाथ भगवान, सोमवार को 8 वें तीर्थंकर चंद्रप्रभ भगवान की विशेष पूजन अर्चना के बाद सोमवार को 9 वें तीर्थंकर पुष्पदन्तनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाडू चढ़ाकर मनाया गया। इस अवसर पर भक्ति भाव के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये गये, जिसमें धर्माबलम्बियों ने बढ़कर भाग लिया। सायं काल की बेला में संगीतमय आरती के उपरांत कसबे के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चौधरी ऋषभ कुमार जैन एवं वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में अनिल कुमार जैन ने शास्त्र प्रवचन के माध्यम से दसलक्षण धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा जीवन में सरलता, ऋजुता, विनम्रता, शुद्धता, समता और परिणामों में शांति के लिए क्रोद्ध को छोड़कर क्षमा भाव, घमंड छोड़कर मार्दव भाव, मायाचारी छोड़कर आर्जव भाव और लोभ छोड़कर शौच धर्म को धारण करने के बाद सत्य को अंगीकार किया जाता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में चौधरी धर्मचंद, जयकुमार, मुलायम जैन, सनत कुमार, अशोक जैन, कमल मोदी, अरूण कुमार, राजीव जैन, प्रकाश चंद्र, मेघराज जैन, महेंद्र कुमार, पुष्पेंद्र जैन, देबेंद्र जैन, प्रवीन कुमार, अरविंद भंडारी, सुशील मोदी, प्रदीप एड, श्रेयांश जैन, राकेश कुमार, हितेंद्र कुमार, प्रीतेश पवैया, कपिल मोदी, शैलेष जैन, जितेंद्र कुमार, धर्णेंद्र जैन, संजय कुमार, अनुराग मिठया, सजल मोदी, रीतेश जैन, चक्रेश कुमार, स्वतंत्र जैन, विकास जैन, सुरेंद्र कुमार, सौरभ जैन, मनीष कुमार, रूपेश जैन, अजय जैन मोनू, प्रशन्न, पंकज, रिंकू, अंजेश, अमन जैन सहित वीर सेवा दल एवं सकल दिगम्बर जैन समाज का सहयोग रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बेला में धार्मिक प्रश्नमंच एवं भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत शिशु वर्ग में 5 से 8 वर्ष के 19 जूनियर वर्ग में 8 से 14 वर्ष के 18 एवं सीनियर वर्ग में 14 से अधिक वर्ष के 21 प्रतिभागियों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी। जिसमें राजीव जैन एडवोकेट, विशाल जैन पवा, रश्मि चौधरी, संगीता मिठया, स्वाति चौधरी एवं रूवी जैन ने निर्णायक की भूमिका निभायी। संचालन चौधरी चक्रेश जैन ने किया। आभार व्यक्त अजय कुमार जैन अज्जू ने किया।

मानवाधिकार मीडिया से अंकित नायक की रिपोर्ट

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