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स्वास्थ्य कर्मियों को समान ग्रेड पे देने का हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला,न्यायाधीश ने कहा-सरकार नहीं कर सकती भेदभाव!

Published on: 10-10-2023

*शमसुलहक खान की रिपोर्ट*

*स्वास्थ्य कर्मियों को समान ग्रेड पे देने का हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला,न्यायाधीश ने कहा-सरकार नहीं कर सकती भेदभाव!*

समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय भी की बार विसंगति दूर करने की कर चुके थे मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य कर्मियों को 2800 रुपये का समान ग्रेड पे देने का आदेश दिया गया है। न्यायालय ने कहा कि सरकार तैनाती तिथि के आधार पर वेतन में विभेद नहीं कर सकती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में कार्यरत सविता देवी व बिन्दुबाला समेत 9 अन्य स्वास्थ्य कर्मियो के वेतन विसंगति मामले में अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकल पीठ ने बस्ती जिले की सविता देवी व बिन्दुबाला त्रिपाठी सहित नौ अन्य की याचिका पर याची के अधिवक्ता के.एल.तिवारी को सुनकर कहा कि राज्य सरकार तैनाती तिथि के आधार पर समान स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन में विभेद नहीं कर सकती है। राज्य सरकार याचिका दायर करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को 2,800 रुपये का समान ग्रेड पे प्रदान करे। कोर्ट ने यह आदेश सविता देवी व बिन्दुबाला त्रिपाठी समेत 9 अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की याचिका मंजूर करते हुए दिया।

ग्रेड पे के निर्धारण में अंतर
याचियों के अधिवक्ता कन्हैयालाल तिवारी का कहना था कि एक दिसंबर 2011 के पहले और इसके बाद नियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों को 5200-20,200 रुपये का वेतनमान समान दिया जा रहा है। सिर्फ उनके ग्रेड पे के निर्धारण में अंतर किया गया है। याचियों को 2,000 रुपये का ग्रेड पे दिया जा रहा है। जबकि एक दिसंबर 2011 तक के बाद नियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों को 2,800 रुपये का ग्रेड पे दिया जा रहा है। ऐसे में उनकी नियुक्ति की तिथि के आधार पर किया जा रहा यह अंतर संविधान के समानता के अधिकार के तहत अनुचित है। लिहाजा याचिकाकर्ता भी 2,800 रुपये का ग्रेड पे पाने के हकदार हैं।

कोर्ट ने पूछा सरकारी वकील से सवाल, नहीं मिला जवाब
वहीं, सरकारी वकील ने कहा कि ग्रेड पे में यह अंतर 19 दिसंबर 2011 के शासनादेश के तहत है। जब कोर्ट ने यह अंतर करने का कारण पूछा तो सरकारी वकील ने कहा कि शासनादेश में इसका कोई कारण नहीं दिया गया है।
कोर्ट में चार माह में भुगतान का दिया आदेश
कोर्ट ने कमल दीप निराला केस मे हुए आदेश का हवाला देते हुए कहा कि शासनादेश, समानता के प्रावधान का उल्लंघन करता है। सरकार समान रूप से कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन भुगतान मामले में महज उनकी तैनाती की तिथियों के आधार पर विभेद नहीं कर सकती है। इस विधिक व्यवस्था के साथ कोर्ट ने याचियों को भी उनकी नियुक्ति की तिथि से , उनके समान कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को दिए जा रहे 2,800 रुपये का ग्रेड पे प्रदान करने का आदेश दिया। साथ ही याचियों को चार माह में एरियर का भुगतान करने का भी आदेश दिया।
ज्ञात हो कि समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा ने समान पद समान कार्य में वेतन विभेद दूर करने की मांग कई बार शासन को पत्र लिखकर कर चुके थे किन्तु विसंगति दूर करना दूर विभाग पत्राचार का जबाव देने से भी कतराता रहा।

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