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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं- हथकरघा समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: राष्ट्रपति मुर्मु ने दिए 22 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हथकरघा भारत की संस्कृति, रोजगार और महिला सशक्तिकरण का मजबूत आधार है। कार्यक्रम में 22 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार और 4 स्मारक डाक टिकट जारी किए गए।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा- हथकरघा केवल आजीविका नहीं, समावेशी विकास का सशक्त माध्यम

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र केवल लोगों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही।

राष्ट्रपति ने कहा कि हजारों वर्षों से हथकरघा भारत की संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा रहा है। इस क्षेत्र ने देश की समृद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ रोजगार, कला, संस्कृति और प्रकृति के प्रति लोगों का जुड़ाव भी मजबूत किया है।

उन्होंने बताया कि देश के हथकरघा क्षेत्र से 35 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें करीब 25 लाख महिलाएं शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी गहराई से जुड़ा रहा है तथा यह देश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने देशभर के बुनकरों, उद्यमियों, डिजाइनरों, विद्यार्थियों और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार हथकरघा उत्पादों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल वस्त्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में हथकरघा उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इसका सीधा लाभ देश के बुनकरों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं से भी बुनाई को रोजगार और उद्यमिता के रूप में अपनाने की अपील की।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2025 के संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए। कुल 22 पुरस्कार दिए गए, जिनमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों से उत्कृष्ट शिल्पकला, नवाचार और भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बुनकरों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में भारत की समृद्ध एवं विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए, जो देश की सांस्कृतिक धरोहर और बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मानित करते हैं।

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं- हथकरघा समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: राष्ट्रपति मुर्मु ने दिए 22 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हथकरघा भारत की संस्कृति, रोजगार और महिला सशक्तिकरण का मजबूत आधार है। कार्यक्रम में 22 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार और 4 स्मारक डाक टिकट जारी किए गए।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा- हथकरघा केवल आजीविका नहीं, समावेशी विकास का सशक्त माध्यम

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत का हथकरघा क्षेत्र केवल लोगों की आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही।

राष्ट्रपति ने कहा कि हजारों वर्षों से हथकरघा भारत की संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न हिस्सा रहा है। इस क्षेत्र ने देश की समृद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ रोजगार, कला, संस्कृति और प्रकृति के प्रति लोगों का जुड़ाव भी मजबूत किया है।

उन्होंने बताया कि देश के हथकरघा क्षेत्र से 35 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें करीब 25 लाख महिलाएं शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हथकरघा भारत के स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की भावना से भी गहराई से जुड़ा रहा है तथा यह देश की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने देशभर के बुनकरों, उद्यमियों, डिजाइनरों, विद्यार्थियों और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार हथकरघा उत्पादों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल वस्त्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में हथकरघा उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इसका सीधा लाभ देश के बुनकरों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं से भी बुनाई को रोजगार और उद्यमिता के रूप में अपनाने की अपील की।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2025 के संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए। कुल 22 पुरस्कार दिए गए, जिनमें 3 संत कबीर हथकरघा पुरस्कार तथा 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों से उत्कृष्ट शिल्पकला, नवाचार और भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले बुनकरों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में भारत की समृद्ध एवं विविध हथकरघा बुनाई परंपराओं को समर्पित चार स्मारक डाक टिकट भी जारी किए गए, जो देश की सांस्कृतिक धरोहर और बुनकर समुदाय के योगदान को सम्मानित करते हैं।

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