वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता इस बार पाकिस्तान को मिली है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 1953 के बाद यह पहला मौका है जब पाकिस्तान इस भूमिका में आया है। यह जिम्मेदारी सदस्य देशों के बीच बारी-बारी से तय होती है और वार्षिक बैठकों के संचालन से जुड़ी होती है। विडंबना यह है कि पाकिस्तान खुद लंबे समय से आईएमएफ के कर्ज कार्यक्रमों पर निर्भर रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था बार-बार संकट से गुजरती रही है। इसी वजह से यह खबर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड अध्यक्ष का पद नीतिगत फैसलों में निर्णायक नहीं होता, लेकिन कूटनीतिक मंच पर इसका प्रतीकात्मक महत्व जरूर है। वार्षिक बैठकों में वैश्विक आर्थिक सुस्ती, कर्ज संकट और विकास वित्त जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।