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भारत इंडोनेशिया में प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण में मदद…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि वे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ मिलकर योग्याकार्ता में 1,000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे।

इंडोनेशिया रवाना होने से पहले दिए अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। उन्होंने इस स्मारक को भारत और इंडोनेशिया को एक हज़ार से ज़्यादा सालों से जोड़ने वाले गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का “एक और शानदार सबूत” बताया।

जकार्ता के इस्ताना मर्देका में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद आज एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मुझे, योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट को लॉन्च करने का सौभाग्य मिलेगा। एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

दरअसल, यह संरक्षण प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का हिस्सा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) प्रम्बानन परिसर में मौजूद कई छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

प्रम्बानन, इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के पास स्थित सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक है। इसमें 9वीं सदी ईस्वी में बनी मूल संरचनाएं शामिल हैं। भूकंप (जिसमें मई 2006 का जावा भूकंप भी शामिल है), ज्वालामुखी विस्फोट और 11वीं सदी की शुरुआत में राजनीतिक सत्ता में बदलाव के कारण ये मंदिर ढह गए थे, और 17वीं सदी में इन्हें फिर से खोजा गया।

प्रम्बानन मंदिर असल में एक कॉम्प्लेक्स है, जिसमें शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित 240 मंदिर हैं। प्रम्बानन को तीन एक-दूसरे के अंदर बने चौकोर हिस्सों के रूप में डिज़ाइन किया गया था। पूरे परिसर में कुल 224 मंदिर हैं। सबसे अंदर वाले चौकोर हिस्से में 16 मंदिर हैं, जिनमें सबसे मुख्य 47 मीटर ऊंचा केंद्रीय शिव मंदिर है; इसके उत्तर में ब्रह्मा का मंदिर और दक्षिण में विष्णु का मंदिर है।

यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है; इसके अनुसार, मंदिर की पत्थर की नक्काशी में रामायण महाकाव्य के इंडोनेशियाई संस्करण को दर्शाया गया है।
प्रम्बानन मंदिर परिसर इंडोनेशिया और इस क्षेत्र में शास्त्रीय काल की उत्कृष्ट कृति के रूप में शिव कला की भव्य संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। वैश्विक संस्था ने बताया कि 1918 से ही इसके जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, जिसमें पत्थरों को आपस में जोड़ने की पारंपरिक विधि और मंदिर के ढांचे को मजबूत करने के लिए कंक्रीट के इस्तेमाल वाली आधुनिक विधि, दोनों का उपयोग किया गया है। मई से अक्टूबर के महीनों में पूर्णिमा की शाम को, मंदिर के दक्षिणी हिस्से में बने खुले थिएटर में रामायण बैले का मंचन किया जाता है।

इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के पहले शिक्षा मंत्री देवांतारा की साझा विरासत का सम्मान करने के लिए आने वाले साल को ‘सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति का टैगोर-देवान्तरा वर्ष’ घोषित किया।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “हम दोनों देश गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा का शताब्दी वर्ष भी धूम-धाम से मनाएंगे। इंडोनेशिया की विकास यात्रा में महान शिक्षाविद और यहां के पहले शिक्षा मंत्री देवान्तरा जी का अहम योगदान रहा है। शिक्षा को लेकर उनके विचारों पर गुरुदेव टैगोर की सोच का गहरा प्रभाव था। इसलिए भारत-इंडोनेशिया, इस शताब्दी वर्ष को “टैगोर और देवान्तरा year of कल्चरल एण्ड एजुकेशनल डिप्लोमेसी” के रूप में मनाएंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति सुबियांतो के निमंत्रण पर दो दिवसीय दौरे पर सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे, आज मंगलवार को पीएम मोदी ने स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों और सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने एक निजी बैठक की, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता हुई।

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