बैकयार्ड मत्स्य पालन से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही आय, योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश : केशव प्रसाद मौर्य

अमरेंद्र कुशवाहा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मत्स्य पालन विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में बैकयार्ड मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को इस योजना से जोड़ते हुए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

शनिवार को समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का सफल मॉडल बनकर उभरी है।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और मत्स्य निदेशालय की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 10 जनपदों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना से जोड़ा गया है। महिलाएं अपने घरों के पास 10 हजार लीटर क्षमता वाले आधुनिक बायोफ्लॉक टैंकों में वैज्ञानिक तरीके से सिंघी मछली का पालन कर रही हैं। कम लागत, कम पानी और कम स्थान में अधिक उत्पादन देने वाली यह तकनीक महिलाओं की आय बढ़ाने में प्रभावी साबित हो रही है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सिंघी मछली प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जिससे प्रदेश में पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिल रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में योजना सफल रही है, वहां के अनुभवों के आधार पर इसे अन्य जनपदों में भी तेजी से लागू किया जाए।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक बायोफ्लॉक टैंक की स्थापना पर लगभग 60 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत प्रति टैंक 30 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। योजना में न्यूनतम बाय-बैक मूल्य 250 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है, जबकि वर्तमान में महिलाओं को बाजार में करीब 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक का मूल्य मिल रहा है।

श्री मौर्य ने कहा कि महिलाओं को वैज्ञानिक मत्स्य पालन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, रोग नियंत्रण, चारा प्रबंधन और बायोफ्लॉक प्रणाली के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। साथ ही तकनीकी संस्थानों के सहयोग से मछली बीज, रोग उपचार और उत्पादन बढ़ाने के लिए निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में 850 बायोफ्लॉक टैंक स्थापित किए जा चुके हैं और 11.5 मीट्रिक टन सिंघी मछली का सफल उत्पादन एवं हार्वेस्टिंग की जा चुकी है। इसके अलावा 173 मत्स्य उत्पादक समूहों के माध्यम से 3,110 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा गया है। पहले उत्पादन चक्र में महिलाओं को प्रति टैंक 30 से 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है, जबकि 233 महिलाओं को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत अनुदान भी मिल चुका है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बैकयार्ड मत्स्य पालन परियोजना केवल अतिरिक्त आय का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने की एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए इसे प्रदेश के अधिक से अधिक जनपदों तक विस्तारित किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।