तीन वर्ष पूर्व चोरी हुई मोटरसाइकिल के मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट को कोर्ट ने किया निरस्त, विवेचना का दिया आदेश 

सोनभद्र,

सोनभद्र। करीब तीन वर्ष पूर्व जिला अस्पताल लोढ़ी परिसर से चोरी हुई मोटरसाइकिल के मामले में पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट को सीजेएम अचल प्रताप सिंह की अदालत ने निरस्त करते हुए राबर्ट्सगंज कोतवाल को अग्रिम विवेचना करने का आदेश दिया है। उक्त आदेश सुकालु पुत्र रामलखन निवासी ग्राम चिचलिक, थाना मांची, जिला सोनभद्र द्वारा अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक के जरिए दाखिल प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पर्याप्त आधार मिलने पर दिया है। बता दें कि विवेचक ने 30 जनवरी 2021 को विवेचना पूर्ण कर कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट प्रेषित किया था। कोर्ट ने 22 सितंबर 2021 को संज्ञान लेते हुए प्रकीर्ण वाद के रूप में दर्ज  कराते हुए मुकदमा वादी को नोटिस जारी किया था। मुकदमा वादी सुकालू अपने अधिवक्ता के जरिए न्यायालय में उपस्थित होकर प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए पुनः विवेचना कराए जाने की याचना किया था। दिए प्रार्थना पत्र में सुकालू ने अवगत कराया था कि उसकी मोटरसाइकिल यूपी 64ए के/2561 जो 10 सितंबर 2020 को रात्रि में जिला अस्पताल लोढ़ी परिसर में सीसीटीवी कैमरा के सामने खड़ी थी गायब हो गई। जब सुबह देखा तो मोटरसाइकिल गायब थी। वह 10 सितंबर 2020 की शाम को अपने भतीजा देवेंद्र पुत्र छोटेलाल को घायला अवस्था में दवा इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। काफी खोजबीन के बाद भी जब मोटरसाइकिल का पता नहीं चला तो तत्काल 112 नंबर पर कॉल कर सूचना दिया। जिसपर पुलिस आई और देखकर चली गई। अगर पुलिस सक्रियता दिखाई होती तो सीसीटीवी फुटेज के जरिए जरूर सुराग मिला होता और सफलता भी मिल गई होती। यह पुलिस की कार्य प्रणाली पर संदेह पैदा कर रहा है। उसने 11 सितंबर 2020 को राबर्ट्सगंज कोतवाली में लिखित सूचना दिया, किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसी दिन जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत किया। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब 14 सितंबर 2020 को पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को शिकायती पत्र दिया तो करीब एक माह बाद 10 अक्तूबर 2020 को राबर्ट्सगंज कोतवाली में चोरी की एफ आई आर दर्ज की गई। जिसकी जांच एसआई सुनील कुमार दीक्षित को दी गई। जब जांच अधिकारी से मिला तो उन्होंने कहा कि मोटरसाइकिल चाहिए तो खर्च लगेगा, अन्यथा अपने से खोजो। विवेचक ने न तो उसका बयान लिया और न ही अस्पताल में साथ रहे गवाहों से ही पूछताछ ही किया। बल्कि मनमाने ढंग से बयान अंकित कर कागजी खानापूर्ति की गई है। उसने मोटरसाइकिल को लोन पर लिया था, जिसका प्रतिमाह 2468 रूपये किस्त देनी पड़ती थी। साग सब्जी बेचकर परिवार का भरण पोषण और समय से किस्त भरता था, लेकिन मोटरसाइकिल चोरी होने के बाद से परेशानी बढ़ गई है। किस्त जमा करने का बार बार दबाव दिया जा रहा है। मामले की जांच एसआई सुनील कुमार दीक्षित, एसआई काशी सिंह कुशवाहा तथा एसआई हरिशंकर सिंह यादव द्वारा की गई है,लेकिन किसी ने भी बयान नहीं लिया। बल्कि मनमाने ढंग से कागजी खानापूर्ति के लिए कुछ चोरों का बयान दर्ज कर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई है,जो अनुचित एवं संदेहास्पद है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए अंतिम रिपोर्ट 30 जनवरी 2021 को निरस्त कर राबर्ट्सगंज कोतवाल को अग्रिम विवेचना कराए जाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मुकदमा वादी को आवश्यक पैरवी अविलंब करने का आदेश दिया है।