ब्लाइंड क्रिकेट एशिया कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम ढाका रवाना होने से पहले दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक महीने के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेगी। इस शिविर में खिलाड़ियों की बल्लेबाजी, गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण, फिटनेस और मैच रणनीति पर गहन अभ्यास कराया जाएगा। कोचों का कहना है कि यह शिविर खिताब बचाने की तैयारी की नींव होगा।
शिविर में खिलाड़ियों को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का अभ्यास कराया जाएगा। दृष्टिबाधित क्रिकेट में गेंद की आवाज सुनकर खेलना होता है, इसलिए खिलाड़ियों की एकाग्रता और आपसी तालमेल सबसे अहम होता है। अभ्यास सत्रों में इसी तालमेल को और मजबूत किया जाएगा।
टीम प्रबंधन ने बताया कि शिविर के दौरान फिटनेस और कंडीशनिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता की जांच की जाएगी और जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। इसके अलावा मानसिक मजबूती के लिए भी सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि दबाव वाले मैचों में खिलाड़ी शांत रह सकें।
भारतीय टीम 2016 में पहला एशिया कप जीत चुकी है और अब एक दशक बाद हो रहे दूसरे संस्करण में भी खिताब बरकरार रखना चाहती है। खिलाड़ियों का कहना है कि वे देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को तैयार हैं और शिविर में पूरी मेहनत करेंगे।



