दीवाली और छठ से पहले बाजारों में स्वदेशी उत्पादों की मांग में साफ बढ़ोतरी देखी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार ग्राहक खरीदारी करते समय यह जरूर पूछ रहे हैं कि सामान कहां बना है और किस कारीगर के हाथ का है। मिट्टी के दीये, हस्तशिल्प की सजावट, खादी के वस्त्र और स्थानीय मिठाइयों की बिक्री में तेजी आई है।
व्यापारियों के मुताबिक त्योहारों के मौसम में लोग अब बड़े ब्रांड के साथ-साथ अपने शहर और गांव के उत्पादों को भी तरजीह दे रहे हैं। इससे छोटे कारीगरों, बुनकरों और महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। ऑनलाइन मंचों पर भी स्थानीय उत्पादों की सूची बढ़ी है, जिससे दूर-दराज के कारीगरों को भी ग्राहक मिल रहे हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि स्थानीय खरीदारी का यह रुझान अगर त्योहारों के बाद भी बना रहा, तो छोटे उद्योगों और रोजगार पर इसका स्थायी असर पड़ेगा। इसके लिए उत्पाद की गुणवत्ता, सही दाम और भरोसेमंद पैकेजिंग को बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि ग्राहक दोबारा भी उसी उत्पाद की ओर लौटे।



