नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल आया है और भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को इस तेजी की बड़ी वजह माना जा रहा है। ऊर्जा बाजार के जानकारों की नजर अब आपूर्ति की स्थिति पर टिकी है।
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में यह उछाल देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बन सकता है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ने की आशंका है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कीमतें ऊंची बनी रहीं तो परिवहन लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। सरकार और तेल कंपनियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।



