यमन के हूती समूह ने मक्का और मदीना पर हमले के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसका निशाना सऊदी अरब के तेल ठिकाने थे। इस बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। पवित्र शहरों की सुरक्षा का मुद्दा दुनिया भर के मुसलमानों के लिए बेहद संवेदनशील है, इसलिए किसी भी तरह के दावे पर कड़ी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यमन में लंबे समय से चल रहे संघर्ष का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। तेल ठिकानों पर हमले की बात से ऊर्जा बाजार में भी हलचल की आशंका रहती है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है। ऐसे में हर पक्ष से संयम बरतने की अपील की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने नागरिक ठिकानों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश की निंदा की है। राजनयिक हलकों का मानना है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही यमन संकट का स्थायी समाधान निकल सकता है, न कि हमलों और जवाबी कार्रवाई के चक्र से।



