संयुक्त राष्ट्र। भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत की रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए उस पर पक्षपात का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने गुरुवार को कहा कि रिपोर्ट में आतंकवाद की गंभीरता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। वह महासभा की तीसरी समिति में विशेष दूत नजीला घनेया की ‘असाधारण परिस्थितियों में धार्मिक या आस्था की स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकार’ विषयक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दे रही थीं।
मंगलानंदन ने कहा कि लोगों के दर्द और नुकसान से राजनीतिक फायदा उठाना ऐसा विषय नहीं होना चाहिए, जिस पर विशेष दूत अपनी रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट कश्मीर में सुरक्षा अभियानों में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार और नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों का जिक्र करती है, लेकिन आतंकवाद के पीड़ितों की चिंता नहीं दिखाती। उन्होंने पाकिस्तानी आरोपों को ‘गहराई से विडंबनापूर्ण’ बताते हुए कहा कि पाकिस्तान ने कारगिल संघर्ष में अपने ही सैनिकों के शव स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिन्हें भारतीय सेना ने सम्मान से दफनाया था।



