सोनभद्र में ग्रामीण महिलाओं ने गोबर से बने दीये और मूर्तियों के जरिए रोजगार की नई राह बनाई है। पर्यावरण के अनुकूल ये उत्पाद दीवाली के मौके पर खास पसंद किए जा रहे हैं। गोबर के दीयों की मांग बढ़ने से महिलाओं को घर बैठे आमदनी मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।
इस पहल की खासियत यह है कि इसमें स्थानीय संसाधन का इस्तेमाल हो रहा है और प्लास्टिक व रसायन वाले उत्पादों का विकल्प भी मिल रहा है। महिलाएं समूह बनाकर दीये, मूर्तियां और सजावटी सामान बना रही हैं, जिनकी बिक्री स्थानीय बाजारों और मेलों में हो रही है। इससे उन्हें न सिर्फ आमदनी मिल रही है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इस तरह के छोटे उद्योग बेहद अहम हैं। अगर इन उत्पादों को बड़े बाजारों और ऑनलाइन मंचों तक पहुंच मिले, तो महिलाओं की आमदनी और बढ़ सकती है। सरकार और स्वयंसेवी संगठनों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रशिक्षण, पैकेजिंग और विपणन में मदद करें, ताकि यह पहल लंबे समय तक चल सके।



