गुजरात के सूरत में हीरा उद्योग की मंदी का असर अब मजदूरों की दिवाली पर साफ दिख रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस बार हीरा मजदूरों को त्योहार के लिए महज दस हजार रुपये अग्रिम राशि दी गई है, जबकि आमतौर पर उन्हें करीब पच्चीस हजार रुपये तक का बोनस या सहायता मिलती थी। मजदूर संगठनों का कहना है कि काम घटने और फैक्ट्रियों में छुट्टियां बढ़ने से परिवारों का बजट बिगड़ गया है।सूरत दुनिया के सबसे बड़े हीरा तराश केंद्रों में से एक है, जहां लाखों मजदूर इस उद्योग से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय मांग में कमी और लैब निर्मित हीरों की प्रतिस्पर्धा के कारण प्राकृतिक हीरों के कारोबार पर दबाव बढ़ा है। कई छोटी इकाइयों में काम के दिन घट गए हैं, जिससे मजदूरों की आमदनी पहले ही कम हो चुकी है।मजदूर नेताओं ने सरकार और उद्योग संगठनों से विशेष पैकेज की मांग की है, ताकि त्योहारी सीजन में परिवारों को राहत मिल सके। उनका कहना है कि हीरा उद्योग गुजरात की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और संकट के समय मजदूरों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में उद्योग की स्थिति पर नजर रहेगी, क्योंकि विदेशी बाजारों की मांग ही तय करेगी कि काम कब पटरी पर लौटेगा।