लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने इस बार उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण के साथ-साथ चुनावी जीत की संभावना को भी प्राथमिकता दी है। सूची में ब्राह्मण चेहरों को खास तवज्जो मिलने से बीजेपी की रणनीति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बीजेपी ने संगठन के पारंपरिक कैडर से जुड़े चेहरों के साथ ऐसे उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा है, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ और चुनाव जीतने की क्षमता मानी जाती है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी इस चुनाव में केवल संगठनात्मक निष्ठा के बजाय ‘विनिबिलिटी’ यानी जिताऊ क्षमता को भी अहम आधार मान रही है।
उम्मीदवारों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश भी दिखाई देती है। खास तौर पर ब्राह्मण समुदाय से जुड़े चेहरों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का प्रयास किया है।
MLC चुनाव के लिहाज से बीजेपी के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधान परिषद में संख्या बल और राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा है। उम्मीदवारों के चयन के बाद अब चुनावी मुकाबले में स्थानीय समीकरण, क्रॉस-वोटिंग और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।