मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई होनी है। इस मामले में कुल 22 याचिकाएं सूचीबद्ध हैं, जिनमें पुनरीक्षण की प्रक्रिया और उसकी समय-सीमा पर सवाल उठाए गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले को लेकर भी सबकी नजर अदालत पर टिकी है।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि पुनरीक्षण एक नियमित और जरूरी प्रक्रिया है, जिससे सूची की शुद्धता बनी रहती है।लोकतंत्र की मजबूती के लिए सटीक मतदाता सूची सबसे बुनियादी शर्त मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत की निगरानी में होने वाली यह सुनवाई आगे की प्रक्रिया के लिए दिशा तय कर सकती है। आयोग को भी अदालत के सवालों का जवाब देना होगा।सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत क्या निर्देश देती है, इस पर राजनीतिक दलों से लेकर आम मतदाताओं तक सबकी नजर रहेगी।