साहित्यिक, सामाजिक संस्था सोन संगम द्वारा मनाई गई महर्षि वेदव्यास की जयंती

उत्तर प्रदेश सोनभद्र,

जिला संवाददाता संतोष कुमार रजक सोनभद्र

शक्तिनगर (सोनभद्र)। साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम शक्तिनगर की ओर से महर्षि वेदव्यास की जयंती एवं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संगोष्ठी तथा काव्य संध्या का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय की स्थापना तथा अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ मानिक चंद पांडेय ने कहा कि आज का यह दिन हिंदू धर्म साधना में बहुत ही पवित्र है आज के दिन जहां एक ओर महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती है वहीं दूसरी ओर गुरु पूर्णिमा भी है।

हिंदू समाज में गुरु का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। दुनिया का सबसे श्रेष्ठ एवं ईश्वर से भी बड़ा गुरु होता है,जो अपने शिष्य को अंधकार से निकाल कर प्रकाश की ओर ले जाता है। एक साथ सौ सूर्य उदित हो जाए किंतु मानव के अंतः करण के अज्ञान की कलिमा को नही मिटा सकते है। केवल गुरु ही अपने ज्ञान के द्वारा अपने शिष्य को मुक्ति दिला सकता हैं।

ऐसा माना जाता है कि गुरु के समान इस संसार में मानव का कोई दूसरा सगा नहीं है,क्योंकि गुरु ही इस संसार से मानव को मुक्ति का रास्ता प्रदान करता है। इस अवसर पर सोंन संगम के अध्यक्ष विनय कुमार अवस्थी का भी जन्मदिन मनाया गया। यह संयोग ही था क्योंकि गुरु पूर्णिमा के दिन ही उनकी जन्म की तिथि होती है।

अतः उपस्थित लोगों द्वारा केक काट कर उनका जन्म दिन मनाया गया तथा उनके दीर्घायु होने तथा निरंतर साहित्य सृजन में कार्यरत रहने की कामना की गयी। काव्य गोष्ठी की आगाज करते हुए डॉ बृजेंद्र शुक्ला ने अपनी पंक्तियां वाग्देवी को प्रस्तुत किया, मैं तो कब से तेरी शरण में हूं,हे माते मुझे भी तो ज्ञान दे। ति मिर मन का हरण कर, नित नवल धवल प्रकाश दे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनय कुमार अवस्थी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर अपनी भावना को कविता के माध्यम से कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया, काव्य सृजन हिन्दी में करना,शौक हमारा रहा निरंतर। जन्म दिन पर नेह आपका,याद रखू गा मै जीवन भर। अपनी ग़ज़ल एवं कथा के लिए मशहूर शायर वह बनारसी ने कुछ इस अंदाज में अपनी गजलों को पेश किया,अब कहा रोक थाम होता है,दिन में रातों का काम होता है।

सोनभद्र क्षेत्र के हिंदी के वयोवृद्ध कवि, कृपाशंकर उर्फ माहिर मिर्जापुरी ने अपनी पंक्तियां कुछ इस तरह लोगों के सामने बया किया,अगर मरना जरूरी है तो देश के लिए मरो। मगर भूल कर कभी भी खुदकुशी न करो।

अतिथियों का स्वागत विजय कुमार दुबे ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन बद्री प्रसाद केसरवानी ने किया। इस अवसर पर डॉ छोटेलाल, रंज कुमारी, वंदना पनिका, मुकेश रेल, सोनू कुमार, सीताराम, नंद किशोर इत्यादि लोग उपस्थित रहे।

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