भागुखेड़ा-जैतीखेड़ा से अयोध्या धाम पहुंचे श्रद्धालु, अब तक 8,750 से अधिक लोगों को निःशुल्क यात्रा का लाभ
शकील अहमद
लखनऊ। प्रभु श्रीराम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा, सेवा और राष्ट्रधर्म के सजीव प्रतीक हैं। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में सेवा, संस्कार और समरसता की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा संचालित रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा अब जनसेवा की एक प्रेरणादायी पहल का स्वरूप धारण कर चुकी है।
इसी क्रम में ग्राम भागुखेड़ा, पोस्ट जैतीखेड़ा, मंडल सरोजनीनगर से 62वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यात्रा में सम्मिलित श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति प्राप्त की।
यह यात्रा केवल अयोध्या धाम तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला अभियान बन चुकी है।
रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा का शुभारंभ 27 सितंबर 2022 को डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा अपनी पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती तारा सिंह की पावन स्मृति में किया गया था।
इस सेवा-यात्रा का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों, मातृशक्ति एवं आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को निःशुल्क अयोध्या धाम ले जाकर प्रभु श्रीरामलला, हनुमानगढ़ी एवं अन्य पवित्र स्थलों के दर्शन कराना है। डॉ. राजेश्वर सिंह की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में अब तक 8,750 से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला के दिव्य दर्शन कर चुके हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जलपान, भोजन, चिकित्सा सहायता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समुचित व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू में स्नान किया, हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया तथा उन्हें रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता व प्रसाद भेंटस्वरूप प्रदान किया गया। ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
डॉ. राजेश्वर सिंह के विचारों के अनुरूप इस यात्रा का उद्देश्य केवल तीर्थ दर्शन कराना नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों-मर्यादा, त्याग, सेवा, कर्तव्य और राष्ट्रधर्म-को जन-जन तक पहुंचाना भी है। यह अभियान नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और अपनी आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
सरोजनीनगर परिवार के लिए यह यात्रा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, बुजुर्ग सम्मान और सामाजिक एकता का सशक्त जनअभियान बन चुकी है। संकल्प है कि सरोजनीनगर में रामभक्ति, सेवा और समरसता की यह अखंड ज्योति निरंतर प्रज्ज्वलित होती रहे।