प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में हेवल नदी को बचाने की मुहिम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले हेवल नदी का पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोत भी सूखने लगे थे। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी को बचाने का अभियान शुरू किया।
इस अभियान में जल स्रोतों की सफाई, जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को अपनाना और लोगों को पानी के महत्व के प्रति जागरूक करना शामिल रहा। धीरे-धीरे नदी में पानी की आवक बढ़ने लगी और आसपास के इलाकों में भी इसका सकारात्मक असर दिखा। यह मुहिम सामुदायिक भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरक उदाहरण बन गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी नदियों और जल स्रोतों को बचाना बड़े पर्यावरणीय संकट से बचने का पहला कदम है। हेवल नदी की कहानी बताती है कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करते हैं, तो सूखती नदी को भी नया जीवन दिया जा सकता है।



