लखनऊ में चल रहे टेक संगम सम्मेलन में साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे पर गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डीपफेक, साइबर धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डिजिटल साक्ष्य की विश्वसनीयता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। अकेले किसी एक संस्था के बस की यह लड़ाई नहीं है।
विशेषज्ञों ने बताया कि तकनीक के विकास के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी बदल रहे हैं। अब वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से नकली वीडियो और आवाज बनाकर लोगों को ठग रहे हैं। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर निवेश के नाम पर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली में एक महिला कांस्टेबल से 24 लाख रुपये की ठगी का मामला इसका ताजा उदाहरण है।
सम्मेलन में साइबर फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य की भूमिका पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य की सही तरीके से जांच होने से अपराधियों को सजा दिलाना आसान होता है। इसके लिए पुलिस और विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में इस दिशा में काफी काम हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग जनकल्याण और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए होना चाहिए। युवाओं को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर न केवल रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं, बल्कि देश की डिजिटल सुरक्षा भी मजबूत होगी। लोगों को भी जागरूक रहना होगा और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल पर भरोसा नहीं करना होगा।



