देश में कार्बन कैप्चर और उसके उपयोग की तकनीक पर काम तेज होने जा रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आईआईटी बॉम्बे और बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र में कार्बन कैप्चर एवं उपयोग के दो राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होंगे। इन केंद्रों में कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ने, उसके रासायनिक रूपांतरण, ईंधन उत्पादन और औद्योगिक उपयोग की तकनीकों पर शोध होगा।
कार्बन कैप्चर तकनीक का मकसद हवा और कारखानों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़कर उसे बेकार गैस की बजाय उपयोगी चीज में बदलना है। इससे सीमेंट, इस्पात और रसायन जैसे उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। अगर पकड़ी गई गैस से ईंधन या रसायन बन सके, तो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा होगा।
इन केंद्रों में शोधकर्ता नई सामग्री, कम ऊर्जा वाली प्रक्रियाएं और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल लायक तकनीक विकसित करेंगे। भारत ने जलवायु लक्ष्यों के तहत उत्सर्जन कम करने की प्रतिबद्धता जताई है, और ऐसी तकनीकें उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही हैं। आने वाले समय में इन केंद्रों से निकली तकनीक उद्योगों तक पहुंचेगी, तो हरित विकास की रफ्तार बढ़ेगी।



