सर्बिया में हुए संसद चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों की चुनावी सूची ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच के गठबंधन को पीछे छोड़ दिया है। यह नतीजा इसलिए खास है, क्योंकि वुचिच की पार्टी लंबे समय से सत्ता में थी और छात्र आंदोलन सड़कों से शुरू होकर अब चुनावी मैदान में पहुंच गया है।
विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। भ्रष्टाचार, सरकार के कामकाज का तरीका और जनता की नाराजगी मतदाताओं के फैसले पर हावी रही। लगभग दो साल से चल रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में यह चुनाव हुआ था, जिसकी शुरुआत 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छत गिरने की घटना से हुई थी, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी।
छात्रों की जीत को सर्बिया की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब नई सरकार के सामने भ्रष्टाचार पर लगाम, संस्थाओं में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को बहाल करने की चुनौती होगी। यूरोप के देश इस नतीजे पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि सर्बिया की आंतरिक राजनीति क्षेत्रीय स्थिरता से भी जुड़ी हुई है।



