आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया को हरी झंडी मिल गई है। सरकार लंबे समय से इस बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही थी। इस सौदे को भारत के सबसे बड़े विदेशी निवेश सौदों में से एक बताया जा रहा है, जिस पर देश-विदेश के निवेशकों की नजरें टिकी हैं।विनिवेश का मतलब है सरकार का किसी सरकारी कंपनी या बैंक में अपनी हिस्सेदारी निजी निवेशकों को बेचना। इससे सरकार को बड़ी रकम मिलती है, जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही निजी प्रबंधन से बैंक की कार्यप्रणाली में सुधार की उम्मीद भी जताई जाती है।इस प्रक्रिया में कर्मचारियों और खाताधारकों के हितों का सवाल भी उठता रहा है। सरकार की ओर से बार-बार कहा गया है कि विनिवेश के बाद भी बैंक की सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी और ग्राहकों के पैसे पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।विशेषज्ञों के मुताबिक बैंकिंग क्षेत्र में यह सौदा आने वाले समय में और निजीकरण की राह खोल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम बोली किसके नाम होती है और प्रक्रिया कब तक पूरी होती है।