केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का तीन वर्षीय लक्ष्य तय किया है। नशा समाज, खासकर युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए इस लक्ष्य को केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जागरूकता से जोड़कर देखा जा रहा है। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करना इस दिशा में उतना ही जरूरी है, जितना तस्करी के नेटवर्क तोड़ना। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि नशा पीड़ितों को अपराधी की जगह मरीज के रूप में देखने का दृष्टिकोण भी नीति का हिस्सा होना चाहिए। राज्य सरकारों, स्कूलों और परिवारों की भागीदारी के बिना यह लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। विशेषज्ञ कहते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों से आ रही तस्करी रोकने के साथ मांग घटाने पर काम करना होगा। सरकार के इस लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर होने की उम्मीद है। युवाओं को खेल, शिक्षा और रोजगार से जोड़ना नशे से बचाव का सबसे स्थायी उपाय माना जाता है।
अमित शाह का 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य

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