आम धारणा है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों को होता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के सामने ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिनमें मरीज ने कभी सिगरेट या बीड़ी नहीं पी होती है। हाल के दिनों में यह विषय फिर चर्चा में आया है और विशेषज्ञों ने इसके कारणों पर रोशनी डाली है।डॉक्टरों के मुताबिक वायु प्रदूषण, दूसरों के धूम्रपान का धुआं, घर के अंदर का धुआं और कुछ आनुवंशिक कारण ऐसे लोगों में इस बीमारी की वजह बन सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेना फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। महिलाओं में भी ऐसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।चिंता की बात यह है कि धूम्रपान न करने वाले मरीजों में बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है, क्योंकि शुरुआती लक्षणों को सामान्य खांसी या संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द या वजन घटना जैसे लक्षण लंबे समय तक रहें तो जांच जरूर करानी चाहिए।विशेषज्ञों की सलाह है कि साफ हवा, धुएं से दूरी और समय पर जांच ही बचाव का सबसे बेहतर रास्ता है। शुरुआती चरण में पता चलने पर इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।