महराजगंज। जिले के नौतनवा थाना क्षेत्र के हनुमानगढ़िया निवासी रेनू गौतम ने कोतवाली महराजगंज में दर्ज गंभीर धाराओं के मुकदमे की विवेचना को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। महिला ने मुख्यमंत्री और पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र भेजकर वर्तमान विवेचक से जांच हटाकर किसी अन्य निष्पक्ष एवं उच्चाधिकारी से विवेचना कराने की मांग की है।शिकायतकर्ता के मुताबिक कोतवाली महराजगंज में आरोपी सुजीत वर्मा पुत्र रामनिवास वर्मा के खिलाफ मुकदमा संख्या 279/2026 बीएनएस की धारा 64(1), 351(3) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v), 3(1)(द) के तहत दर्ज कराया गया था। महिला का आरोप है कि विवेचना के दौरान उस पर दबाव बनाया गया। शिकायत में विवेचक पर कथित रूप से रुपये मांगने और मांग पूरी नहीं होने पर मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगाकर केस खत्म करने की बात कहने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
4 जून को दर्ज हुई सूचना जीडी में भी उल्लेख
मामले से संबंधित पुलिस रिकॉर्ड में 4 जून 2026 को शाम 5:03 बजे थाने पर सूचना प्राप्त होने का उल्लेख है। जनरल डायरी में जीडी संख्या 041 दर्ज है। रिकॉर्ड के अनुसार घटना स्थल थाने से पश्चिम दिशा में करीब 16 किलोमीटर दूर त्रिमुहानी पुल के पास बन्ने चौर बताया गया है। सूचना का प्रकार लिखित दर्ज किया गया है।
न्यायालय में सुनवाई फिर भी केस डायरी पर सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत के लिए एससी/एसटी एक्ट न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। मामले में 6 अगस्त और 13 अगस्त 2026 को सुनवाई की तारीख निर्धारित थी। महिला का आरोप है कि इसके बावजूद केस डायरी समय से न्यायालय में नहीं भेजी गई।
महिला ने इसे विवेचना की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि न्यायालय में सुनवाई की तारीख तय होने के बावजूद केस डायरी भेजने में देरी की वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
85 दिन बाद भी कार्रवाई की गति पर सवाल
4 जून से 28 अगस्त 2026 तक करीब 85 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद शिकायतकर्ता द्वारा विवेचना की गति और निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला ने खुद को अकेली बताते हुए कहा है कि विवेचना में कथित देरी और दबाव के कारण वह मानसिक रूप से परेशान है।उसने मांग की है कि वर्तमान विवेचक से जांच हटाकर किसी अन्य निष्पक्ष अधिकारी या उच्चाधिकारी को विवेचना सौंपी जाए और न्यायालय में केस डायरी समय से भेजने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए।शिकायत और पुलिस रिकॉर्ड के बीच उठे कई सवाल इस पूरे मामले में पुलिस रिकॉर्ड में 4 जून की सूचना दर्ज होने न्यायालय में सुनवाई की तारीखें निर्धारित होने और शिकायतकर्ता द्वारा विवेचना में देरी के आरोप लगाए जाने के बाद कई सवाल सामने आए हैं। 85 दिन में विवेचना कहां तक पहुंची? अब तक क्या कार्रवाई हुई? न्यायालय में केस डायरी समय से क्यों नहीं भेजी गई? इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।फिलहाल रुपये मांगने केस खत्म करने की धमकी देने और विवेचना प्रभावित करने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ यह भी जरूरी है कि विवेचना की वास्तविक प्रगति और कथित देरी की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए। अब देखना होगा कि पुलिस विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है।