मुंबई। वायु प्रदूषण का संकट अब सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली और नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक के 200 से 300 के पार पहुंचने के साथ-साथ मुंबई में भी हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है।
प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। दिल्ली मेट्रो ने मेट्रो के 20 फेरे बढ़ा दिए हैं, ताकि लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। निर्माण स्थलों पर 250 से अधिक एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पराली और स्थानीय कारणों से बढ़ रहा पीएम 2.5 फेफड़ों, दिल और दिमाग के लिए हानिकारक है। इससे ब्रोंकाइटिस और सांस की समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने नागरिकों को एन95 मास्क पहनने और बाहरी गतिविधियां सीमित करने का सुझाव दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े शहरों में वायु प्रदूषण अब मौसमी समस्या नहीं, बल्कि स्थायी चुनौती बन चुका है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी जरूरी है।



