संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की संयुक्त राष्ट्र और उसके घोषणापत्र के प्रति स्थायी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि आज की बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है, ताकि वे दुनिया की मौजूदा वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से दर्शा सकें।
संयुक्त राष्ट्र दिवस हर वर्ष 24 अक्टूबर को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1945 में संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र लागू हुआ था। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा कार्यालय ने घोषणापत्र की प्रस्तावना की मूल पांडुलिपि भी साझा की, जिसमें हस्तलिखित टिप्पणियां दर्ज हैं। 81 वर्ष पहले 50 देशों ने सैन फ्रांसिस्को में शांति और समृद्धि के साझा सपने के साथ इस संगठन की नींव रखी थी।
जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, वैश्विक सहयोग और वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं का समर्थन जारी रखना होगा। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है, ताकि विकासशील देशों और उभरती शक्तियों को वैश्विक शासन में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने भी महासभा में कहा कि आठ दशक पहले लड़े गए युद्ध के परिणाम आज भी सुरक्षा परिषद की बनावट को तय कर रहे हैं, जिससे संगठन की वैधता कम हो रही है। भारत का मानना है कि सुधारों से ही संयुक्त राष्ट्र प्रभावी और प्रतिनिधिक बना रह सकेगा।



