मध्य प्रदेश के उज्जैन में मंदिरों को गिरवी रखकर 645 करोड़ रुपये का ऋण लेने के प्रस्ताव पर विवाद तेज हो गया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है और कहा है कि धार्मिक स्थलों को आर्थिक लेन-देन में शामिल करना उचित नहीं है। यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समाज की आस्था के केंद्र हैं। इन्हें गिरवी रखने से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होंगी। विरोध कर रहे लोगों ने प्रशासन से इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज होगा।
उज्जैन शिप्रा नदी के तट पर बसा प्राचीन धार्मिक नगर है। यहां अगस्तेश्वर महादेव सहित कई प्राचीन मंदिर हैं और शिप्रा तट पर 200 से अधिक संतों की समाधियां हैं। इन स्थलों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए इनसे जुड़ा कोई भी फैसला संवेदनशील माना जाता है।
प्रशासन का कहना है कि प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और सभी पक्षों की राय ली जाएगी। धार्मिक संगठनों ने भी इस मामले में अपनी राय रखने की बात कही है। लोगों की मांग है कि विकास कार्यों के लिए दूसरे विकल्प तलाशे जाएं, न कि मंदिरों को गिरवी रखा जाए।



