नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच असैन्य परमाणु सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच हुई चर्चा में परमाणु सुरक्षा, साझेदारी और नवाचार को प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग दोनों देशों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों पर भी लगातार काम कर रहा है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग से तकनीक, सुरक्षा मानकों और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को नई गति मिल सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि परमाणु क्षेत्र में भरोसे पर आधारित साझेदारी भविष्य की ऊर्जा नीति के लिए अहम साबित होगी। चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि किसी भी सहयोग की पहली शर्त सुरक्षा और पारदर्शिता होगी। दोनों पक्षों ने इस दिशा में नियमित संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई है। आने वाले समय में इस साझेदारी के ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।