एफआईसीसीआई एफएलओ और डॉ. राजेश्वर सिंह मिलकर 100 महिलाओं को बनाएंगे ड्रोन पायलट : सिमरन साहनी

170 तारा शक्ति केंद्रों के साथ सरोजनीनगर को महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की पहल

शकील अहमद

लखनऊ। होटल ताज महल, लखनऊ में एफआईसीसीआई एफएलओ लखनऊ द्वारा आयोजित विशेष संवाद सत्र “पुलिस सेवा से राजनीति तक, शक्ति से जनसेवा तक: डॉ. राजेश्वर सिंह, विधायक” में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रतिष्ठित पत्रकार एवं लेखिका शैली चोपड़ा के साथ संवाद करते हुए पुलिस सेवा से राजनीति तक की अपनी यात्रा, महिला सशक्तिकरण, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, कौशल विकास और जनसेवा पर विचार साझा किए। कार्यक्रम की मेजबानी एफआईसीसीआई एफएलओ लखनऊ की अध्यक्ष सिमरन साहनी एवं कार्यकारिणी समिति ने की।

पुलिस सेवा से राजनीति तक—हर नागरिक की समस्या मेरी जिम्मेदारी

डॉ. सिंह ने कहा कि पुलिस सेवा में दायित्व मुख्यतः कानून के अनुपालन और कानून-व्यवस्था तक केंद्रित रहता है, जबकि जनप्रतिनिधि के रूप में नागरिक की छोटी से छोटी समस्या भी जिम्मेदारी बन जाती है।

उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में नगर निगम, एलडीए, परिवहन, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों को जनसमस्याओं के समाधान के लिए 20,000 से अधिक पत्र भेजे गए हैं।

उन्होंने क्षेत्र में बंदरों के उत्पात से 30 से अधिक नागरिकों के प्रभावित होने का उदाहरण देते हुए बताया कि समस्या के समाधान के लिए मथुरा से विशेषज्ञ टीम बुलाकर 10 दिवसीय अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा, “बड़ी विकास परियोजना हो या किसी नागरिक की रोजमर्रा की समस्या—जनसेवा में हर विषय महत्वपूर्ण है।”

170 तारा शक्ति केंद्र—प्रशिक्षण से आय और उद्यम तक

महिलाओं को समाज और अर्थव्यवस्था की निर्णायक शक्ति बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि उन्हें केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उद्यमी और आर्थिक विकास की नेतृत्वकर्ता बनाना होगा।

उन्होंने बताया कि सरोजनीनगर में अब तक 170 तारा शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं और 2,000 से अधिक सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, स्वरोजगार, स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।

100 महिलाएँ बनेंगी ड्रोन पायलट

डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला उद्यमिता, नेतृत्व और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए एफआईसीसीआई एफएलओ के कार्यों की सराहना करते हुए अध्यक्ष सिमरन साहनी, कार्यकारिणी समिति एवं सभी सदस्यों का आह्वान किया कि वे सरोजनीनगर के साथ मिलकर महिला सशक्तिकरण का ऐसा मॉडल विकसित करें, जिसे पूरे भारत में दोहराया जा सके।

इस अवसर पर एफआईसीसीआई एफएलओ लखनऊ की अध्यक्ष सिमरन साहनी ने घोषणा की कि एफआईसीसीआई एफएलओ, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के साथ मिलकर 100 महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करेगा।

यह पहल महिलाओं को नई तकनीक और तेजी से उभरती ड्रोन अर्थव्यवस्था से जुड़े रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

डॉ. सिंह ने सरोजनीनगर के 170 तारा शक्ति केंद्रों को एफआईसीसीआई एफएलओ की मार्गदर्शन व्यवस्था, कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि
“हमारा लक्ष्य केवल महिलाओं को प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि उनके कौशल को आय, उद्यम और सशक्तिकरण में बदलना है।”

एफआईसीसीआई एफएलओ की अध्यक्ष, कार्यकारिणी एवं उपस्थित सदस्यों ने इस पहल का स्वागत करते हुए सरोजनीनगर को महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट एवं अन्य स्थानों पर भी लागू किए जा सकने वाला मॉडल बनाने की दिशा में मिलकर कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।

शिक्षा, खेल और भविष्य के कौशल पर फोकस

डॉ. सिंह ने बताया कि सरोजनीनगर में बालिका विद्यालयों एवं कॉलेजों में स्मार्ट कक्षा और डिजिटल पुस्तकालय विकसित किए गए हैं, 120 प्राथमिक विद्यालयों में सामाजिक दायित्व के तहत झूले स्थापित किए गए हैं तथा 200 से अधिक बालिका युवा क्लबों को खेल संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। 1,000 से अधिक मेधावी बालिकाओं को लैपटॉप, कंप्यूटर, साइकिल एवं अन्य शैक्षिक संसाधन दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन के दौर में रोजगार तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए नए कौशल सीखना और मौजूदा कौशल को बेहतर बनाना शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक है।

इस दिशा में उन्होंने मुख्यमंत्री को विशेष रूप से नए कौशल सीखने और मौजूदा कौशल को बेहतर बनाने पर केंद्रित विश्वविद्यालयों की स्थापना का सुझाव भी दिया है।

“शक्ति का वास्तविक अर्थ लोगों को सशक्त बनाना है”

कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को विकास की बुनियादी शर्त बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सुरक्षित वातावरण ही महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा के दो दशकों से अधिक के अनुभव ने उन्हें अनुशासन, संवेदनशीलता और प्रशासनिक दृष्टि दी, जबकि राजनीति ने जनसेवा और नीति-निर्माण के माध्यम से व्यापक स्तर पर परिवर्तन का अवसर प्रदान किया।

एफआईसीसीआई एफएलओ की सफल महिला उद्यमियों एवं पेशेवरों से उन्होंने आह्वान किया कि वे अपनी विशेषज्ञता और अनुभव को समाज के लिए समर्पित करें। व्यक्तिगत सफलता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति समाज को वापस देना है।

सरकार, उद्योग, जनप्रतिनिधि और एफआईसीसीआई एफएलओ जैसी संस्थाएँ साथ आएँ तो महिला सशक्तिकरण को एक स्थायी आर्थिक आंदोलन बनाया जा सकता है।