अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका का डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब चार प्रतिशत की तेजी के साथ 103.27 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ है। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ गई है और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका जताई जा रही है।
तेल की कीमतों में तेजी का कारण मध्य पूर्व में तनाव को माना जा रहा है। सऊदी अरब की ऊर्जा बुनियादी ढांचे और जहाजरानी मार्गों पर हमलों की खबरों के बाद बाजार में चिंता बढ़ी है। अमेरिका ने सऊदी अरब से अपने गैर-जरूरी कर्मचारियों को हटाने का आदेश भी दिया है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ता है। कच्चे तेल के महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ता है और महंगाई भी बढ़ सकती है। इससे आम लोगों के खर्च पर असर पड़ता है और सरकार के सामने भी चुनौती खड़ी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो कीमती धातुओं सहित अन्य बाजारों पर भी दबाव बना रह सकता है। मध्य प्रदेश में बिटुमेन की कीमतों में तेजी से सड़क निर्माण परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। बाजार अब मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



