नई दिल्ली। राष्ट्रपति ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने भी महान वैज्ञानिक को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। कलाम का पूरा जीवन सादगी, कठोर परिश्रम और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा, इसलिए उनकी जयंती हर वर्ष देशभर में विशेष सम्मान के साथ मनाई जाती है। डॉ. कलाम ने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा अनुसंधान को नई ऊंचाई दी थी। मिसाइल कार्यक्रमों में उनके योगदान के कारण उन्हें मिसाइल मैन कहा गया। वे मानते थे कि सपने वे नहीं होते जो सोते समय देखे जाते हैं, बल्कि सपने वे होते हैं जो सोने नहीं देते। उनका यह विचार आज भी लाखों युवाओं और विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जयंती के अवसर पर देश के अनेक शैक्षणिक संस्थानों में विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि कलाम की विरासत को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका शिक्षा और अनुसंधान को गांव-गांव तक पहुंचाना है। राष्ट्रपति की ओर से दी गई यह श्रद्धांजलि इसी संदेश को रेखांकित करती है कि ज्ञान, ईमानदारी और सेवा ही सच्ची देशभक्ति का आधार हैं।