नई दिल्ली। रक्षा विमानन के क्षेत्र में तुर्किये के हुरजेट विमान की बढ़ती चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज कर दी है। स्पेन के साथ हुई नई रक्षा डील के बाद विशेषज्ञ इसे भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के लिए चुनौती के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि दोनों विमान प्रशिक्षण और हल्के हमले की भूमिका में एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी माने जाते हैं।तेजस को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है और इसके उन्नत संस्करण पर काम जारी है। भारत कई देशों को तेजस निर्यात करने की कोशिश में है। ऐसे में हुरजेट की यूरोपीय बाजार में एंट्री से निर्यात की दौड़ और कठिन होने की आशंका जताई जा रही है।रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कीमत, तकनीक, डिलीवरी का समय और साझेदार देश के साथ राजनीतिक संबंध किसी भी डील में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भारत के लिए जरूरी है कि तेजस कार्यक्रम की गति बढ़ाई जाए और उत्पादन क्षमता मजबूत की जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारतीय विमान अपनी जगह बनाए रख सके और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बल मिले।