जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना एक साल पूरा कर लिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस मौके पर सरकार ने अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए अपनी उपलब्धियां गिनाई हैं, वहीं विपक्षी दलों ने सरकार को वादाखिलाफी के आरोपों में घेरा है। राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग अब भी प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बनी हुई है और सरकार का कहना है कि वह इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।सत्ता पक्ष का दावा है कि एक साल में प्रशासनिक सुधार, भर्ती प्रक्रियाओं और जनकल्याण योजनाओं पर काम हुआ है। दूसरी ओर विपक्ष का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए और बेरोजगारी तथा महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार की रफ्तार धीमी रही। पीडीपी और भाजपा समेत अन्य दलों ने अलग-अलग मोर्चों पर सरकार की आलोचना की है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश की सीमित शक्तियों के बीच सरकार के लिए चुनौतियां बड़ी हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा, परिसीमन के बाद की राजनीति और सुरक्षा स्थिति जैसे मुद्दे आने वाले समय में भी सरकार की परीक्षा लेते रहेंगे। एक साल पूरा होने पर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।