नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत ने आठ वर्ष पूरे कर लिए हैं। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के मुताबिक इस अवधि में योजना ने करोड़ों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज का खर्च एक बड़ी चिंता से निकालकर भरोसे में बदला है। योजना के तहत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज की सुविधा कैशलेस तरीके से मिलती है, जिससे गंभीर बीमारी के समय परिवारों को कर्ज या संपत्ति बेचने जैसी मजबूरी से काफी हद तक राहत मिली है।आठ वर्षों में आयुष्मान कार्डों का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ है और गांवों से लेकर शहरों तक के अस्पताल इस व्यवस्था से जुड़े हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब छोटे कस्बों के मरीज भी बड़े अस्पतालों में इलाज कराने की हिम्मत जुटा पाते हैं। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड और दावों के निपटारे की व्यवस्था ने प्रक्रिया को पहले से पारदर्शी बनाया है।हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। कई इलाकों में जागरूकता की कमी, सूचीबद्ध अस्पतालों की दूरी और दावों के भुगतान में देरी जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में योजना का दायरा और सुविधाएं दोनों बढ़ाई जाएंगी, ताकि हर पात्र परिवार तक इसका लाभ समय पर पहुंच सके।