शकील अहमद
बिलग्राम, हरदोई। सरज़मीने बिलग्राम की सदियों पुरानी अज़ादारी की गौरवशाली परंपरा के तहत अंजुमन बज़्म-ए-हुसैनिया क़दीम की ओर से ऐतिहासिक शब्बेदारी एवं चुप ताज़िया का आयोजन 21 अगस्त, शुक्रवार को रात आठ बजे से किया जाएगा।
7-8 रबीउल अव्वल 1448 हिजरी के अवसर पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम ऐतिहासिक इमामबाड़ा कलां, सैयदवाड़ा, कस्बा बिलग्राम में होगा। इस वर्ष यह ऐतिहासिक शब्बेदारी अपने 103वें वर्ष में प्रवेश कर रही है।
कार्यक्रम का आगाज़ दरगाह हज़रत अब्बास (अ.स.) में मजलिस-ए-अज़ा से होगा। मजलिस के बाद आलम-ए-मुबारक का जुलूस निकाला जाएगा, जो बिलग्राम की ऐतिहासिक गलियों से होता हुआ इमामबाड़ा कलां पहुंचेगा।
इसके बाद पूरी रात शब्बेदारी का सिलसिला जारी रहेगा। आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले नाज़िम, शोअरा, नौहाख़्वान, अंजुमन-ए-मातमी और बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल होंगे।
शब्बेदारी के दौरान मजालिस, मर्सिया-ख़्वानी, नौहाख़्वानी और सीना-ज़नी के माध्यम से शोहदाए करबला और हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया जाएगा। आयोजन का समापन फ़ज्र की नमाज़ के बाद अलविदाई मजलिस के साथ होगा।
इसके पश्चात बिलग्राम की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ऐतिहासिक चुप ताज़िया का जुलूस करबला की ओर रवाना होगा।
जुलूस के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर तक़रीर और नक़ाबत पेश की जाएगी। अंजुमनों द्वारा नौहाख़्वानी और मातम भी किया जाएगा। करबला पहुंचने के बाद पारंपरिक रस्मों के साथ अज़ादारी का यह कार्यक्रम संपन्न होगा।
आयोजकों के अनुसार 103 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल अज़ादारी का आयोजन नहीं, बल्कि बिलग्राम की गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे, मोहब्बत और धार्मिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान भी है।
आयोजकों ने मोमिनीन, अज़ादारों, अंजुमन-ए-मातमी, नौहाख़्वानों, शोअरा और सभी अकीदतमंदों से कार्यक्रम में शामिल होकर इस ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है।
आयोजकों ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से इंसाफ, आज़ादी, इंसानियत, सच्चाई, इत्तेहाद और भाईचारे का संदेश आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा रहा है।