– LDA और पुरानी परियोजनाओं को लेकर अखिलेश यादव पर साधा निशाना, अंसल, JPNIC और गोमती रिवरफ्रंट का उठाया मुद्दा
शकील अहमद
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि लखनऊ अब “City of Scams” की छवि से निकलकर “City of Dreams” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को समाप्त करने की मांग को लेकर अखिलेश यादव पर सवाल उठाते हुए सपा सरकार के कार्यकाल में लखनऊ की कई प्रमुख परियोजनाओं से जुड़े विवादों और समस्याओं का उल्लेख किया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि LDA को समाप्त करने की मांग उठाने से पिछली सरकार के कार्यकाल की जवाबदेही का सवाल समाप्त नहीं होता। उन्होंने सवाल किया कि सपा सरकार के समय LDA जनहित का नियामक था या प्रभावशाली बिल्डरों की सुविधा का माध्यम?
अंसल-सुशांत गोल्फ सिटी का उठाया मुद्दा
अंसल-सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि परियोजना सपा सरकार से पहले शुरू हुई थी, लेकिन उनके अनुसार सपा के पांच वर्ष के शासनकाल में इसकी प्रभावी निगरानी को लेकर सवाल उठते हैं।
उन्होंने प्रकाशित रिपोर्टों और LDA की प्रारंभिक जांच से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुल 3,489 बंधक भूखंडों में से 2,747 की रजिस्ट्री का मामला सामने आया। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 411 एकड़ बंधक भूमि की जांच करनी पड़ी और जून 2025 तक अंसल से संबंधित मामलों की संख्या 224 FIR तक पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। जून 2025 में अंसल API के खिलाफ कुल 224 मामलों की रिपोर्टिंग हुई थी।
डॉ. सिंह ने सवाल उठाया कि यदि बंधक जमीन की बिक्री हुई, तो LDA, राजस्व विभाग और पंजीकरण विभाग की भूमिका क्या रही? रजिस्ट्री रोकने की व्यवस्था क्यों प्रभावी नहीं रही? उन्होंने कहा कि हजारों होमबायर्स को अपनी जमा पूंजी, रजिस्ट्री, कब्जे और मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों तक परेशान होना पड़ा।
हालांकि, हालिया घटनाक्रम में LDA द्वारा बंधक भूखंडों से जुड़े आवंटियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 3,489 भूखंड LDA के पास गारंटी के तौर पर बंधक थे और इनमें से 2,747 भूखंडों की बिक्री का मामला सामने आया।
JPNIC पर भी उठाए सवाल
JPNIC का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने इसे सपा सरकार की वित्तीय और परियोजना प्रबंधन व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना पर खर्च बढ़कर करीब ₹821 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि परियोजना लंबे समय तक अधूरी रही।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, JPNIC परियोजना पर ₹821.74 करोड़ खर्च हुए हैं और जुलाई 2025 में राज्य सरकार ने इसके संचालन की जिम्मेदारी LDA को सौंपने का निर्णय लिया था।
डॉ. सिंह ने उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें JPNIC को निजी संचालन के लिए देने की बात सामने आई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऐसी व्यवस्था जनहित में थी तो दस्तावेज, मूल्यांकन, टेंडर शर्तें और संबंधित संस्था का विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने वर्तमान व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि चयनित निजी ऑपरेटर को शेष कार्य अपने खर्च पर पूरा करना होगा, ₹25 करोड़ की परफॉर्मेंस गारंटी देनी होगी और संचालन शुरू होने के बाद LDA को ₹6 करोड़ वार्षिक भुगतान करना होगा, जिसमें हर वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी। हालिया रिपोर्टों में भी ₹25 करोड़ की परफॉर्मेंस गारंटी और ₹6 करोड़ वार्षिक भुगतान की व्यवस्था दर्ज है।
गोमती रिवरफ्रंट पर भी सवाल
गोमती रिवरफ्रंट का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने परियोजना की लागत और क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परियोजना पर शुरुआती अनुमान से काफी अधिक खर्च होने के बावजूद काम अधूरा रहा और टेंडरिंग, कार्य आवंटन तथा क्रियान्वयन से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप जांच का विषय बने।
उन्होंने सवाल किया कि गोमती नदी को प्रदूषण और सीवेज से मुक्त करने के बजाय निर्माण कार्यों को प्राथमिकता क्यों दी गई।
डॉ. सिंह ने कहा कि उनके अनुसार पिछली सरकार के दौरान कई परियोजनाओं में पहले घोषणा और फिर बढ़ती लागत तथा अधूरे काम की स्थिति सामने आई। उन्होंने कहा कि इसका असर आम लोगों और होमबायर्स पर पड़ा तथा कई परियोजनाओं की समस्याओं का समाधान बाद की सरकारों के सामने आया।
LDA को लेकर कहा- संस्थाएं नहीं, व्यवस्था कमजोर होती है
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “संस्थाएं खराब नहीं होतीं; भ्रष्ट राजनीति, राजनीतिक हस्तक्षेप और बिल्डर-ब्यूरोक्रेसी नेक्सस उन्हें कमजोर करते हैं।”
उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि बंधक भूखंडों की रजिस्ट्री कैसे हुई, हजारों होमबायर्स को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, JPNIC पर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी परियोजना लंबे समय तक अधूरी क्यों रही और गोमती रिवरफ्रंट से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या रही।
डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने पिछली परियोजनाओं और उनसे जुड़े विवादों के समाधान की चुनौती है। उन्होंने होमबायर्स के हितों की रक्षा, बंधक भूखंडों की जांच और कानूनी कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि अधूरी परियोजनाओं के व्यावहारिक समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है।
अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि लखनऊ को आधुनिक बुनियादी ढांचे, सुशासन, पारदर्शिता और बेहतर अर्बन प्लानिंग के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य लखनऊ को “City of Scams” की छवि से बाहर निकालकर “City of Dreams” की दिशा में आगे बढ़ता देखना है।
उन्होंने कहा, “लखनऊ अब पीछे नहीं लौटेगा-न गुंडाराज, न भ्रष्टाचार, न बिल्डर नेक्सस। जनता सपा का ‘City of Scams Model’ देख भी चुकी है और भुगत भी चुकी है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में लखनऊ उस विरासत से बाहर निकलकर विकास, सुशासन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर अर्बन प्लानिंग के साथ ‘City of Dreams’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।”