– सीएसआर और विधायक निधि से शिक्षा संस्थानों को संसाधन उपलब्ध कराने की पहल, करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थियों को अब तक मिल चुका प्रोत्साहन
शकील अहमद
लखनऊ। सरोजनीनगर क्षेत्र में शिक्षा को लेकर डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल के तहत अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज को सीएसआर के माध्यम से पांच स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
इसके अलावा दो विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विधायक निधि से 10-10 लाख रुपये की सहायता की जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और तकनीक आधारित शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है।
31 अगस्त को अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने कॉलेज को सीएसआर के माध्यम से पांच स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध कराने की पहल की। उन्होंने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल कौशल और वित्तीय साक्षरता से सशक्त बनाना आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आवश्यक है।
उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक से सुसज्जित स्मार्ट क्लासरूम छात्राओं को बेहतर शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उनके सीखने के अनुभव को भी नई दिशा देंगे।
इसी क्रम में स्वर्गीय प्रियंका सिंह के असामयिक निधन के बाद उनके पति एवं पत्रकार प्रभात सिंह से मुलाकात के दौरान डॉ. सिंह को जानकारी हुई कि प्रियंका सिंह गांव के बच्चों के लिए कक्षा पांच तक विद्यालय संचालित करती थीं। इसके बाद उनकी स्मृति में विद्यालय में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विधायक निधि से 10 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की गई।
इसी प्रकार सरोजनीनगर के एक सुदूर गांव में श्री राम रईस रावत के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे डॉ. सिंह ने वहां संचालित एक छोटे विद्यालय को देखा। विद्यालय सीमित संसाधनों और झोपड़ियों से शुरू होकर एक छोटे भवन तक पहुंचा था।
रावत के पुत्र श्रवण कुमार रावत द्वारा विद्यालय संचालित किए जाने की जानकारी मिलने पर डॉ. सिंह ने अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए विधायक निधि से 10 लाख रुपये देने की घोषणा की।
शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल के तहत आधारभूत सुविधाओं के साथ डिजिटल संसाधनों पर भी जोर दिया जा रहा है। उनके अनुसार, अब तक करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप, कंप्यूटर और साइकिल प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जा चुका है।
वहीं, 70 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर हजारों बच्चों को आधुनिक एवं तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ा गया है।
विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उदाहरण भी सामने आए हैं। एक ध्वजारोहण कार्यक्रम में गांव के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया और छह प्रतिभाशाली बच्चों को साइकिलें प्रदान की गईं।
वहीं, के.आर. मंगलम स्कूल के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान एक छात्रा ने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने और नीट की तैयारी करने की इच्छा बताई, जिसके बाद डॉ. सिंह ने उसे लैपटॉप उपहार में दिया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “सड़कें कुछ वर्षों के लिए बनती हैं, लेकिन विद्यालय पीढ़ियों का निर्माण करते हैं और राष्ट्र की दिशा बदलते हैं। सड़कें स्थानों को जोड़ती हैं, जबकि शिक्षा बच्चों को अवसरों से और देश को उसके उज्ज्वल भविष्य से जोड़ती है। इसीलिए मेरी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट हैं—अधिकतम संभव संसाधन विद्यालयों, डिजिटल शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर खर्च किए जाने चाहिए।”
उन्होंने कहा, “हमारे द्वारा निर्मित प्रत्येक कक्षा, उपलब्ध कराया गया प्रत्येक कंप्यूटर और प्रोत्साहित किया गया प्रत्येक मेधावी बच्चा भारत के भविष्य में किया गया निवेश है। मेरा संकल्प है कि संसाधनों के अभाव में किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे का सपना अधूरा न रहे।”
इन पहलों के माध्यम से शहर के प्रतिष्ठित कॉलेजों से लेकर सुदूर गांवों के विद्यालयों तक विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने शिक्षा को प्राथमिकता बताते हुए हर प्रतिभा को प्रोत्साहन और बच्चों को सीखने, आगे बढ़ने तथा अपने सपने साकार करने के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही है।