ईरान में उन्नीस वर्षीय छात्रा नजमेह अमीनी को सुनाई गई फांसी की सजा को लेकर देश और दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इस सजा को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। छात्रा का मामला ईरान में सरकार विरोधी भावनाओं का प्रतीक बन गया है।रिपोर्टों के मुताबिक नजमेह अमीनी छात्र आंदोलनों से जुड़ी रही हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि युवाओं की आवाज दबाने के लिए कड़ी सजाओं का सहारा लिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनकी रिहाई की मांग तेज हो गई है और दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ता इस मामले पर नजर रखे हुए हैं।ईरान में पहले भी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल लोगों को कड़ी सजाएं सुनाई जाती रही हैं, जिन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंता जता चुका है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी हर नागरिक का मूल अधिकार है।मानवाधिकार समूहों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। अब सभी की नजर ईरान की न्याय व्यवस्था के अगले कदम पर है, क्योंकि इस फैसले का असर देश के युवा आंदोलन पर गहरा पड़ सकता है।