– वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए तराई क्षेत्र में अब तक 9 कार्यक्रम आयोजित
शकील अहमद
सरोजनी नगर (लखनऊ)। “पर्यावरण संरक्षण केवल दायित्व नहीं, भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक संकल्प है” इसी भावना के साथ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर संचालित ‘पर्यावरण योद्धा-हरित प्रहरी’ अभियान पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अभियान का उद्देश्य प्रकृति, वन्यजीवों, वनों और जैव विविधता की रक्षा के साथ समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में अब तक 9 वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
पीलीभीत, बहराइच के कतर्नियाघाट और लखीमपुर खीरी समेत विभिन्न क्षेत्रों में हुए कार्यक्रमों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण, वन सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
पलिया कलां से हुई अभियान की शुरुआत
अभियान की शुरुआत 12 जनवरी 2025 को लखीमपुर खीरी के पलिया कलां स्थित गुरु गोविंद सिंह राजकीय महाविद्यालय में आयोजित वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण से हुई।
कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना एवं विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की उपस्थिति में सैकड़ों लोगों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।
इस अवसर पर पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 फ्रंटलाइन स्टाफ को सम्मानित किया गया, जबकि 30 वन्यजीव वाचरों को साइकिल प्रदान की गईं।
महाविद्यालय में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना एवं लोकार्पण के साथ पांच मेधावी छात्र-छात्राओं को टैबलेट भी वितरित किए गए। अभियान के तहत 300 से अधिक छात्र-छात्राओं को सरोजनीनगर के ताराशक्ति केंद्रों में निर्मित पर्यावरण अनुकूल बैग और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित पुस्तकें वितरित की गईं।
इसके माध्यम से युवाओं को पर्यावरण संरक्षण का प्रहरी बनने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा, डीएफओ-पीटीआर मनीष सिंह, डीएफओ पीलीभीत भरत कुमार डीके, तत्कालीन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल, अम्बिका मिश्रा एवं रामेश्वर सिंह सहित वन विभाग और प्रशासन से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे।
प्रकृति और विकास के बीच संतुलन का संदेश
‘पर्यावरण योद्धा’ अभियान का संदेश है कि विकास और प्रकृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हो सकते हैं। सामुदायिक सहभागिता, युवाओं की भागीदारी और वन विभाग के सहयोग से अभियान स्वच्छ हवा, निर्मल जल, सुरक्षित वन्यजीव और हरित भविष्य के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर आम लोगों, युवाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।