जालौन में आजादी के बाद पहली बार साहू-राठौर-प्रणामी समाज को मिला बड़ा राजनीतिक मंच; एमएलसी चुनाव से बदला क्षेत्रीय समीकरण
स्वतंत्रता के सात दशकों से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के उपरांत भी जनपद जालौन के राजनीतिक इतिहास में एक विशाल सामाजिक वर्ग का प्रतिनिधित्व निरंतर उपेक्षा का शिकार रहा है। संख्याबल, व्यापारिक सहभागिता और सामाजिक सक्रियता के दृष्टिकोण से अत्यंत निर्णायक भूमिका निभाने वाला तेली समाज (साहू, राठौर, प्रणामी समाज) आजादी के बाद से ही मुख्यधारा के विधायी प्रतिनिधित्व की बाट जोह रहा था।
स्थानीय अधिवक्ताओं, सामाजिक प्रतिनिधियों एवं राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि आजादी से लेकर अब तक किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल ने इस विशाल वर्ग को सांसद, विधायक अथवा जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे शीर्ष संवैधानिक व प्रशासनिक पदों पर प्रतिनिधित्व का अवसर प्रदान नहीं किया। समाज के प्रबुद्ध वर्गों में यह कसक लंबे समय से व्याप्त थी कि उन्हें प्रायः केवल ‘वोट बैंक’ के रूप में देखा गया और उनके सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक उत्थान के लिए कोई सुदृढ़ एवं दीर्घकालिक योजना धरातल पर नहीं उतारी गई।
*भाजपा का युगांतरकारी निर्णय: राजनीतिक जख्मों पर मलहम*
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामाजिक वेदना के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 हेतु *’इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र’* से श्री अशोक कुमार राठौर को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किए जाने के निर्णय को एक युगांतरकारी कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मात्र एक सीट पर प्रत्याशी चयन तक सीमित नहीं है, अपितु यह बुंदेलखंड और प्रयागराज क्षेत्र में वर्षों से उपेक्षित तैलिक समाज को मुख्यधारा से जोड़ने, उनके राजनीतिक आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने और वर्षों पुराने सामाजिक जख्मों पर मलहम लगाने की एक सुविचारित पहल है। प्रबुद्ध वर्ग के ओजस्वी संबल के रूप में पहचाने जाने वाले श्री अशोक कुमार राठौर को उच्च सदन का प्रत्याशी बनाकर पार्टी ने इस विशाल मतदाता वर्ग का दिल जीत लिया है।
*घोषणा होते ही अभूतपूर्व हर्षोल्लास: ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचे लोग, बांटी मिठाइयां*
श्री अशोक कुमार राठौर का नाम आधिकारिक रूप से घोषित होते ही जनपद जालौन सहित पूरे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के साहू, राठौर एवं प्रणामी समाज में एक नई ऊर्जा, उमंग और अभूतपूर्व उत्साह की लहर दौड़ गई। दशकों पुरानी राजनीतिक उपेक्षा का अंत होते देख समाज के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होकर समाज के लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया और भव्य आतिशबाजी कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। लोगों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर मिष्ठान वितरण किया और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का सहर्ष आभार जताया। इस निर्णय ने पूरे क्षेत्र के राजनीतिक वातावरण को अत्यंत जीवंत और उत्सवमय बना दिया है।
*एकात्म मानवदर्शन और सामाजिक न्याय का संगम*
इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से श्री राठौर की उम्मीदवारी को क्षेत्रीय बुद्धिजीवियों और प्रबुद्ध समाज का व्यापक समर्थन मिल रहा है। प्रबुद्ध जनों का कहना है कि यह निर्णय एकात्म मानवदर्शन के सिद्धांतों, बेदाग शुचिता और समाज के प्रति निस्वार्थ निष्ठा का न्यायसंगत व गौरवमयी प्रतिफल है। स्नातकों एवं शिक्षकों के संवैधानिक व वैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु समर्पित उनका सशक्त नेतृत्व अब उच्च सदन में जन-सामान्य और प्रबुद्ध वर्ग की एक बुलंद आवाज बनेगा।
*अधिवक्ता एवं प्रबुद्ध वर्ग द्वारा ऐतिहासिक अभिनंदन*
इस ऐतिहासिक एवं ऐतिहासिक निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता, कवि एवं पत्रकार *संतोष कुमार साहू (एडवोकेट)* इंद्रजीत सिंह राठौर एड,अजय राठौर एड ,अमित राठौर एड,भगत सिंह राठौर एड ,कालीप्रसाद राठौर एडवोकेट,ब्रजेन्द्र सिंह राठौर,एड जगदीश राठौर मुंशी, ,,सहित संपूर्ण साहू-राठौर-प्रणामी समाज एवं प्रबुद्ध स्नातकों ने श्री अशोक कुमार राठौर जी को प्रचंड विजय हेतु अपनी ऐतिहासिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की हैं।
*समग्र प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में बुंदेलखंड की राजनीति में सामाजिक समरसता, बेदाग शुचिता और संतुलित प्रतिनिधित्व का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।*
✍️ रोहित कुमार गोपाल दिवेदी कि रिपोर्ट

