– सरोजनीनगर विधायक ने महिला प्रतिनिधित्व, शाह बानो प्रकरण और तीन तलाक का किया उल्लेख, राजनीतिक दलों से महिला सम्मान पर स्पष्ट पक्ष रखने की मांग
शकील अहमद
सरोजनी नगर, लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला-सम्मान, महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महिलाओं को अधिकार, सम्मान और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने के लिए राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों का उल्लेख करते हुए महिला सम्मान के मुद्दे पर कथित दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े विभिन्न मामलों में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं समान होनी चाहिए। उनके मुताबिक, महिलाओं के अधिकारों का समर्थन राजनीतिक दल या विचारधारा देखकर नहीं किया जाना चाहिए।
शाह बानो प्रकरण और तीन तलाक के मुद्दे का जिक्र करते हुए विधायक ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर भी राजनीतिक दलों को वोट-बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ सभी महिलाओं को बिना किसी भेदभाव के उनके अधिकार दिलाना है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर डॉ. सिंह ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधायिकाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। ऐसे में महिला राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर सभी दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकारों में महिला मंत्रियों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महिलाओं से समर्थन मांगने वाले राजनीतिक दलों को सत्ता में भी उन्हें उचित स्थान देना चाहिए।
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए डॉ. सिंह ने मुलायम सिंह यादव की विवादास्पद टिप्पणी, आजम खान की तत्कालीन सांसद रमा देवी के प्रति की गई टिप्पणी और महिला आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी के पुराने रुख का उल्लेख किया। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से महिलाओं की गरिमा और राजनीतिक भागीदारी पर पार्टी का पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
डॉ. सिंह ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान के लिए सभी राजनीतिक दलों को समान मानदंड अपनाने चाहिए। उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों और महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा की घटनाओं पर भी समान रूप से आवाज उठाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि महिला हिंदू हो या मुस्लिम, सत्ता पक्ष की हो या विपक्ष की, उसके अधिकारों और गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल नारी-शक्ति का उल्लेख करना नहीं, बल्कि महिलाओं को वास्तविक अधिकार, अवसर और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करना है।




