खतरा दिखे तो चुप न रहें, तुरन्त 112 पर करें काल : स्तुति गुप्ता
रिपोर्ट :- फ़तेह खान
रुदौली-अयोध्या। रास्ते में छेड़छाड़ हो या साइबर ठगी का खतरा…किसी अनजान कॉल से परेशानी हो या अचानक कोई आपात स्थिति सामने आ जाए, अब चुप रहना नहीं, मदद मांगना है। मिशन शक्ति अभियान फेज-5 के तहत मंगलवार को रुदौली पुलिस ने ऐहार चौकी क्षेत्र अंतर्गत शारदीय नवरात्र के दृष्टिगत मिशन शक्ति अभियान चलाया गया। जिसमें दुर्गा पूजा पंडाल में महिलाओं व बालिकाओं को विभिन्न प्रकार की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। पुलिस ने साफ संदेश दिया है। कि परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते पुलिस और हेल्पलाइन की मदद लेना ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। इसी क्रम में ऐहार चौकी प्रभारी स्तुति गुप्ता के नेतृत्व में उपनिरीक्षक बालेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल छोटेलाल कनौजिया, कांस्टेबल सलमान अली, राहुल गौतम, धर्मेंद्र यादव ने बारी चौराहे पर दुर्गा पूजा पंडाल में उपस्थित महिलाओं व बालिकाओं से सीधा संवाद किया। और सभी को सुरक्षा संबंधी विभिन्न प्रकार की जानकारी दी गई।
-एक नंबर, मदद का रास्ता
ऐहार चौकी प्रभारी स्तुति गुप्ता ने महिलाओं व बालिकाओं को महिला सुरक्षा के लिए 1090, आपात स्थिति में 112, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 102 और 108 तथा साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 की जानकारी दी।और उन्होंने बताया कि किसी भी खतरे या परेशानी की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल संबंधित हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें।
-एक क्लिक भी पड़ सकता है भारी
साइबर अपराध को लेकर स्तुति गुप्ता ने महिलाओं व बालिकाओं को खास तौर पर सतर्क किया। अनजान लिंक पर क्लिक न करने, संदिग्ध कॉल और संदेशों से सावधान रहने तथा निजी या गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करने की सलाह दी गई। साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी गई।
-अधिकार जानेंगी, तभी मजबूत होगी सुरक्षा
पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की जानकारी भी दी। उद्देश्य सिर्फ हेल्पलाइन नंबर बताना नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकार, सुरक्षा उपाय और सरकारी सहायता तंत्र से जोड़ना रहा।
-दुर्गा पूजा पंडाल में पहुंचा सुरक्षा का संदेश
मिशन शक्ति के तहत ऐहार चौकी के बारी चौराहे पर दुर्गा पूजा पंडाल में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस ने महिलाओं और बालिकाओं से सीधा संवाद किया। उन्हें बताया गया कि किसी भी तरह की परेशानी को चुपचाप सहने के बजाय आवाज उठाएं। और समय रहते मदद लें। सुरक्षा व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब महिलाएं और बालिकाएं अपने अधिकारों और मदद के रास्तों से परिचित हों।



