– 8 सामुदायिक सौर ऊर्जा संयंत्र, 5 सोलर ट्री, 7 ईवी चार्जिंग स्टेशन और 3 तालाबों के विकास पर जोर
शकील अहमद
लखनऊ/सरोजनीनगर। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र को सुरक्षित, प्रकाशमान, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से ‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, इसके तहत स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र और जनभागीदारी को एक साथ जोड़कर सतत विकास की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “नेट जीरो सरोजनीनगर केवल एक पर्यावरणीय अभियान नहीं, बल्कि भविष्य के सरोजनीनगर के लिए दीर्घकालिक विकास दृष्टि है। हमारा लक्ष्य है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता मिले और स्वच्छ ऊर्जा स्थानीय विकास का अभिन्न हिस्सा बने।”
उनके अनुसार, सरोजनीनगर में 60 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित की जा चुकी है। इसके साथ ही ₹1.64 करोड़ की लागत से 8 आरडब्ल्यूए में सामुदायिक सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं। वहीं, ₹25.18 लाख की लागत से जोनल पार्क में सोलर पावर प्लांट स्थापित किया गया है। इसे सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में पहल बताया गया है।
क्षेत्र में 3,000 से अधिक सोलर स्ट्रीट लाइट और 200 से अधिक सोलर स्ट्रीट मास्ट भी लगाए गए हैं। इनके माध्यम से गलियों, संपर्क मार्गों, ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य आवश्यक सार्वजनिक स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा 5 सोलर ट्री और 7 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा की बचत और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलने की बात कही गई है।
डॉ. सिंह ने कहा, “जहाँ अंधेरा है, वहाँ प्रकाश पहुँचे; जहाँ बिजली पर निर्भरता है, वहाँ सौर ऊर्जा विकल्प बने—यही सुरक्षित, सुगम और नेट जीरो सरोजनीनगर की दिशा में हमारा प्रयास है।”
उन्होंने कहा कि बेहतर सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का आधार भी है। पर्याप्त रोशनी से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और देर शाम आवागमन करने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान अधिक सुगम और सुरक्षित बनते हैं।
जल संरक्षण और हरित विकास पर भी जोर
‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ के तहत ₹9 करोड़ की लागत से 3 तालाबों के विकास के माध्यम से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही हरित क्षेत्रों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 1,400 पौधों का वितरण भी किया गया है। इससे पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
डॉ. सिंह ने कहा कि नेट जीरो का अर्थ केवल अधिक से अधिक पेड़ लगाना नहीं है, बल्कि ऊर्जा के उपयोग से होने वाले उत्सर्जन को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और विकास को पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी है।
उन्होंने कहा, “विकास का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएं नहीं हैं। किसी गली का अंधेरा दूर होना, किसी बेटी का सुरक्षित घर पहुंचना, किसी बुजुर्ग के लिए रास्ता सुगम होना और यह सब ऊर्जा की बचत के साथ संभव होना भी विकास है।”
डॉ. राजेश्वर सिंह ने नागरिकों से ऊर्जा एवं जल की बचत, एकल-उपयोग प्लास्टिक के कम इस्तेमाल, कचरे के उचित प्रबंधन और पौधों के संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।
भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी व्यापक दृष्टि के अनुरूप सरोजनीनगर में सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देते हुए ‘नेट जीरो सरोजनीनगर’ की पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “आज लिया गया पर्यावरणीय संकल्प आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। हमारा प्रयास है कि नेट जीरो सरोजनीनगर विकास, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का प्रेरक मॉडल बने।”