कांग्रेस विधायक-जिलाध्यक्ष पर हिंगड़ के गंभीर आरोप
बोलीं—हमारे पास सबूत, 29 पार्षदों के साथ जयपुर-दिल्ली जाएंगे; आलाकमान को बताएंगे किसने दिया धोखा
पाली। नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस के हाथ से सत्ता निकलने के बाद पार्टी के भीतर घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के 29 पार्षद होने के बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया के महापौर निर्वाचित होने के बाद अब कांग्रेस नेता व पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने पार्टी के स्थानीय नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हिंगड़ ने कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी और जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपुरोहित की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी के भीतर कुछ लोगों की भूमिका के कारण भाजपा का बोर्ड बन गया। हिंगड़ का दावा है कि उनके पास इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े सबूत हैं और वे इन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने रखेंगे
उन्होंने कहा कि 29 पार्षदों के साथ जयपुर जाकर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के सामने पूरा मामला रखा जाएगा। जरूरत पड़ी तो दिल्ली जाकर कांग्रेस आलाकमान को भी बताया जाएगा कि पार्टी के साथ किसने धोखा किया।
29 पार्षद, फिर भी कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ 3 वोट
पाली नगर निगम में कुल 65 पार्षद हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी। भाजपा के 21 और निर्दलीय 15 पार्षद चुने गए थे। महापौर चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 33 था।
इसके बावजूद महापौर चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट, निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 वोट और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को महज 3 वोट मिले।
कांग्रेस के 29 पार्षदों की संख्या और पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को मिले सिर्फ तीन वोटों के बीच 26 मतों का अंतर सामने आया। यही अंतर अब कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है।
भाजपा को 21 के मुकाबले मिले 33 वोट
भाजपा के पास पार्षद चुनाव के बाद 21 सीटें थीं, लेकिन महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले। यानी भाजपा प्रत्याशी को अपने दल की संख्या से 12 अधिक मत मिले। वहीं हिंगड़ को 29 वोट मिले, जो कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों की संख्या के बराबर हैं।
हालांकि महापौर चुनाव गुप्त मतदान से हुआ था। इसलिए उपलब्ध चुनाव परिणामों के आधार पर यह आधिकारिक तौर पर तय नहीं किया जा सकता कि किस दल या किस पार्षद ने किस प्रत्याशी को वोट दिया।
हिंगड़ का दावा—‘आलाकमान के सामने रखेंगे पूरा हिसाब’
हिंगड़ ने कहा कि यह केवल एक चुनाव हारने का मामला नहीं है। पार्टी के भीतर चुनाव से पहले और मतदान के दौरान क्या घटनाक्रम रहा, इसकी जानकारी कांग्रेस नेतृत्व के सामने रखी जाएगी।
उनका कहना है कि 29 पार्षदों को साथ लेकर जयपुर जाएंगे और प्रदेश नेतृत्व को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देंगे। इसके बाद दिल्ली जाकर आलाकमान के सामने भी शिकायत रखी जाएगी।
हिंगड़ के अनुसार, उनके पास ऐसे तथ्य और सबूत हैं जिनके आधार पर पार्टी के भीतर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जाएगी।
विधायक-जिलाध्यक्ष की भूमिका पर उठे सवाल
हिंगड़ के आरोपों के बाद पाली विधायक भीमराज भाटी और कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपुरोहित की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और दोनों नेताओं का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
कांग्रेस के सामने अब तीन बड़े सवाल
महापौर चुनाव के बाद कांग्रेस के सामने तीन अहम सवाल खड़े हो गए हैं—पहला, पार्टी के 29 पार्षदों के बावजूद अधिकृत प्रत्याशी को सिर्फ तीन वोट क्यों मिले? दूसरा, भाजपा प्रत्याशी को 33 वोट कैसे मिले? और तीसरा, क्या पार्टी संगठन के भीतर ऐसी कोई रणनीतिक चूक हुई, जिसकी वजह से कांग्रेस बहुमत के करीब पहुंचने के बावजूद महापौर पद गंवा बैठी?
अब इन सवालों के जवाब कांग्रेस की अंदरूनी समीक्षा और हिंगड़ की ओर से बताए जा रहे कथित सबूतों के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल पाली कांग्रेस की राजनीति में निगाहें जयपुर और दिल्ली पर हैं। हिंगड़ और उनके साथ बताए जा रहे पार्षद यदि प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के सामने औपचारिक शिकायत रखते हैं, तो यह विवाद पार्टी के भीतर आगे किस रूप में बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी।

