– सरोजनीनगर विधायक ने सामाजिक एकता, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकजुटता पर दिया जोर
शकील अहमद
सरोजनीनगर (लखनऊ)। विजयादशमी के पावन अवसर पर सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाज को जातिवाद, वैमनस्य और विभाजनकारी विचारधारा से मुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अधर्म, अन्याय, अहंकार और असत्य पर धर्म, न्याय एवं सत्य की विजय का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण कराता है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में रावण का प्रतीक केवल एक पुतले तक सीमित नहीं है। जातिवाद, समाज में आपसी वैमनस्य फैलाने वाली मानसिकता और सनातन परंपराओं के प्रति अपमानजनक सोच भी ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना समाज को एकजुट होकर करना चाहिए। उन्होंने इन प्रवृत्तियों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से परास्त करने का संकल्प लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विधायक ने श्रीराम मंदिर निर्माण के विरोध, अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोलीबारी की घटना तथा कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार और उनके विस्थापन जैसे विषयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता को राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के कार्यों का आकलन तथ्यों के आधार पर करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता की जागरूकता और जनमत ही सबसे बड़ी ताकत है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों से है। विजयादशमी हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने तथा सत्य, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देती है।
अंत में उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे जातिगत भेदभाव और आपसी वैमनस्य से ऊपर उठकर सनातन संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने विजयादशमी के संदेश को जीवन में अपनाते हुए समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का आह्वान किया।




